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हाथियों को हादसों से बचाने के लिए घटाई गई ट्रेनों की रफ्तार

Elephants on railway tracks (Symbolic Image)

हाथियों की सुरक्षा के लिए दक्षिण-पूर्व जोन ने ट्रेनों की रफ्तार को कम किया है। हावड़ा-मुंबई रेलमार्ग के खेमासुली, गिद्धनी और बांसतोला स्टेशन के बीच पहली बार यह आदेश जारी हुआ है। अब 40 किमी की रफ्तार से ट्रेनें चलेंगी। पहले इन स्टेशनों के बीच सौ किमी से अधिक स्पीड में ट्रेनें चलती थीं। एक महीना पहले ही तीन हाथियों की ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस की चपेट में आकर मौत हुई थी।

इस हादसे के बाद हावड़ा-मुंबई रेलमार्ग स्थित चक्रधरपुर और खड़गपुर मंडल में वन विभाग की मदद से एक बार फिर हाथियों के विचरण क्षेत्र का सर्वे हो रहा है। ट्रेन हादसों में हाथियों की मौत की घटना ओडिशा और पश्चिम बंगाल की पटरियों पर ज्यादा हुए हैं।

40 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार तय

ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाप एसोसिएशन के महासचिव पारस कुमार के अनुसार, हाथियों की मौत के बाद गार्डेनरीच में यह मुद्दा उठाया गया था। इससे 43 किमी की दूरी में रोज शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक एक्सप्रेस ट्रेनों और मालगाड़ी को 40 किमी प्रतिघंटे की गति से चलाने का आदेश दिया गया है। पहले इस इलाके से गुजरने वाली ट्रेनों के चालक तेज आवाज में सायरन बजाकर चलाते थे।

18 जगह संवेदनशील

वन विभाग की रिपोर्ट पर राउरकेला, झारसुगुड़ा, नुआगांव, जुरुली, बांसपानी और नोवामुंडी समेत लगभग सवा सौ किमी तक दूरी के स्टेशनों के बीच 18 जगह संवेदनशील हैं। यहां हाथियों के झुंड विचरण करते देखे जाते हैं।

चार महीने में सात हाथियों की मौत

हावड़ा-मुंबई मार्ग पर इस साल चार महीने में ही सात हाथियों की मौत हो चुकी है। 16 अप्रैल को धुतरा व बागडीह स्टेशनों के बीच हावड़ा-मुंबई मेल से चार हाथियों की मौत हुई थी। फिर 6 अगस्त को गिद्धनी स्टेशन के पास तीन हाथियों की ट्रेन की टक्कर से मौत हुई थी।

2017 में दो हाथी मरे

खड़गपुर और चक्रधरपुर मंडल की रेललाइन पर 29 सितंबर-17 को गिद्धनी स्टेशन के पास पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस से एक हाथी मौत। बंडामुंडा-किरीबुरु के बीच 14 अप्रैल-17 को भी एक हाथी की मौत हुई। 2015-16 में सात हाथियों की मौत ट्रेन की टक्कर से हुई थी।

एक घटना से तीन परेशानी

रेलवे में वन विभाग की मदद से एलीफेन्ट कॉरीडोर चिन्हित है। हाथियों से टकराने पर ट्रेनें बेपटरी हो जाती हैं। अक्सर इस तरह के हादसों से इंजन फेल हो हो जाते हैं। दुर्घटना के बाद लोको पायलट को रेलवे और वन विभाग की जांच और पूछताछ से गुजरना पड़ता है।

12 महत्वपूर्ण ट्रेनें होंगी प्रभावित

हावड़ा-मुंबई मेल, हावड़ा-कुर्ला ज्ञानेश्वरी, हटिया-हावड़ा क्रियायोगा, जगदलपुर-हावड़ा संबलेश्वरी, हावड़ा-हापा पोरबंदर, हावड़ा-पुणे आजाद हिन्द, पुरी-हरिद्वार उत्कल, भुवनेश्वर-आनंद विहार संपर्क क्रांति, नीलांचल व पुरुषोत्तम समेत हावड़ा-टाटा स्टील और शालीमार-कुर्ला एक्सप्रेस रात में अप-डाउन करती है।

उत्तराखंड में इस साल सात हाथियों की मौत  

ट्रेनों की तेज रफ्तार से हाथियों की मौत के मामले में उत्तराखंड भी पीछे नहीं है। इस साल प्रदेश में सात हाथियों की मौत हो चुकी है। जिसमें से चार की मौत ट्रेन से कटकर हुई। इनमें दो कुमाऊं और दो गढ़वाल में हुई हैं। हाथियों के मुख्य कोरिडोर यहां राजाजी पार्क में कासरो मोतीचूर है जिसमें करीब 18 किलोमीटर का रेलवे ट्रैक है।

ट्रेन की रफतार कम की गई

हादसों के बाद रेलवे ने ट्रेन की स्पीड रात में 35  और दिन में 40 की है। जबकि हाईकोर्ट ने इसे 25 करने को कहा है। राजाजी डायरेक्टर सनानत के अनुसार ट्रैक पार करने को बड़े बड़े सात रैंप बनाए गए हैं, ट्रैक के आसपास रोजाना सफाई होती है। ताकि हाथी वहां फल या कचरा खाने ना आएं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई गई है। कुछ जगह मोशन सेंसर लगवाए जा रहे हैं। बाइक और  पैदल गश्त रात भर की जाती है। इन उपायों के बाद तीन माह से अभी हादसे नहीं हुए हैं।

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  • Web Title:Speed of trains reduced to save elephants from accidents