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राज्यों को विशेष दर्जा, ढेर सारे मंत्रालय; आज NDA की बैठक में जमकर होगी सौदेबाजी?

इससे पहले केंद्रीय मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने बृहस्पतिवार को दिनभर एक बैठक की और सरकार गठन के प्रयासों को गति देने को लेकर विचार-विमर्श किया।

राज्यों को विशेष दर्जा, ढेर सारे मंत्रालय; आज NDA की बैठक में जमकर होगी सौदेबाजी?
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Amit Kumarएजेंसियां,नई दिल्लीFri, 07 Jun 2024 12:40 AM
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नरेंद्र मोदी को नेता चुनने के लिए शुक्रवार यानी आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नवनिर्वाचित सांसदों की बैठक होगी। नरेंद्र मोदी का तीसरी बार शपथ ग्रहण समरोह रविवार को हो सकता है। मोदी के राजग संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद तेदेपा अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू और जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नीतीश कुमार जैसे गठबंधन के वरिष्ठ सदस्य राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे और उन्हें समर्थन देने वाले सांसदों की सूची सौंपेंगे। सूत्रों ने कहा कि मोदी सप्ताहांत में संभवत: रविवार को शपथ ले सकते हैं। राजग के पास 293 सांसद हैं, जो 543 सदस्यीय लोकसभा में बहुमत के 272 के आंकड़े से अधिक है।

भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और चंद्रबाबू नायडू सहित एनडीए के कई बड़े गुरुवार शाम ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। इससे पहले केंद्रीय मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने बृहस्पतिवार को दिनभर एक बैठक की और सरकार गठन के प्रयासों को गति देने को लेकर विचार-विमर्श किया। यह बैठक भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा के आवास पर हुई। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद थे। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इस बैठक में भावी मंत्रिपरिषद के गठन में राजग के घटक दलों की भागीदारी सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई। 

अग्निपथ योजना पर सवाल

सरकार गठन के प्रयासों के बीच यह बैठक ऐसे समय में हुई जब जद (यू) ने सेना में भर्ती की अग्निपथ योजना की समीक्षा की मांग उठा दी। जदयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने इससे पहले संवाददाताओं से कहा, ‘‘मतदाताओं में (अल्पकालिक सेना भर्ती) अग्निपथ योजना को लेकर गुस्सा है। हमारी पार्टी उन कमियों को दूर करना चाहती है।’’ नड्डा के आवास पर हुई बैठक के बाद भाजपा अध्यक्ष नड्डा और शाह ने शाम में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। समझा जाता है कि सरकार गठन के स्वरूप पर पार्टी के शीर्ष नेताओं ने इस मुलाकात के दौरान चर्चा की। इस बीच, जद(यू) के वरिष्ठ नेता और बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि मंत्रीपद का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और हमारे नेता नीतीश कुमार जी के द्वारा तय किया जाएगा। कुमार ने कहा, ‘‘केंद्रीय मंत्रिमंडल में जद(यू) को कितने मंत्री पद मिलनी चाहिए, इस बारे में निर्णय हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष (नीतीश कुमार) करेंगे, लेकिन यह ‘सम्मानजनक’ होना चाहिए।’’

आंध्र को "विशेष राज्य का दर्जा" देने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ा

आंध्र प्रदेश के लिए ‘‘विशेष राज्य के दर्जे’’ की लंबे समय से लंबित मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है, क्योंकि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के गठन के लिए एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) का समर्थन महत्वपूर्ण हो गया है। तेदेपा और जनसेना ने आंध्र प्रदेश से क्रमशः 16 और दो सीट पर जीत दर्ज की है। केंद्र में गठबंधन सरकार बनाने के लिए ये सीट महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि इस बार भाजपा के पास अपने बलबूते सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं जय भारत नेशनल पार्टी के संस्थापक वी वी लक्ष्मीनारायण ने कहा कि यह आंध्र प्रदेश के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग करने का ‘‘उपयुक्त मौका’’ है, क्योंकि केंद्र में तेदेपा का समर्थन महत्वपूर्ण हो गया है। राजनीतिक विश्लेषक तेलकापल्ली रवि ने कहा कि तेदेपा को भाजपा से आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करनी चाहिए, क्योंकि केंद्र में उसका समर्थन महत्वपूर्ण है। वर्ष 2014 के आम चुनाव में अपने चुनाव अभियान के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाएगा।

जून, 2019 में संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार के पास कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा था कि हालांकि ओडिशा, राजस्थान, बिहार, तेलंगाना, झारखंड, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश से अनुरोध प्राप्त हुए हैं।

जद (यू) की नजर केंद्र में ‘‘तीन’’ मंत्रालयों पर

केंद्र में अगली सरकार के गठन के लिए भारतीय जनता पार्टी अपने सहयोगियों पर काफी हद तक निर्भर रहने के बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जद (यू) केंद्रीय मंत्रिमंडल में ‘‘सम्मानजनक’’ प्रतिनिधित्व दिए जाने की उम्मीद कर रही है। नीतीश ने 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में केवल एक स्थान की पेशकश को ठुकरा दिया था, और तीन साल तीन साल बाद उनकी पार्टी ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था। राजग में तेदेपा के बाद जद(यू) भाजपा की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी बनकर उभरी है।

नाम नहीं बताने की शर्त पर जद (यू) के एक शीर्ष नेता ने कहा कि पार्टी की नजर कैबिनेट की ‘‘तीन’’ सीट पर है, जिससे उसे जाति गणना का प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है, जो अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। बिहार में 12 लोकसभा सीटें जीतने वाली जद(यू) के वरिष्ठ नेता और बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और हमारे नेता नीतीश कुमार जी के द्वारा तय किया जाएगा।

जद(यू) सूत्रों ने कहा कि पार्टी को चुनाव से पहले कथित तौर पर तीन कैबिनेट पद और एक राज्य मंत्री (एमओएस) पद देने का वादा किया गया था। 2004 और 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद यह जद(यू) का तीसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन है जब पार्टी ने क्रमशः आठ और दो सीटें जीती थीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 16 सीटें जीती थीं। सूत्रों ने कहा कि नीतीश कुमार अपनी पार्टी के नवनिर्वाचित सांसदों के लिए भी बड़े मंत्रालयों रेलवे, ग्रामीण विकास, कृषि, जल संसाधन एवं भारी उद्योग जैसे विभागों की मांग कर सकते हैं।

राज्य को विशेष दर्जा देने की भी मांग

केंद्र में अगली सरकार के गठन के लिए भारतीय जनता पार्टी अपने सहयोगियों पर काफी हद तक निर्भर रहने के बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जद(यू) ने स्पष्ट कर दिया है कि वह विशेष राज्य का दर्जा जैसी अपनी मांगों पर कायम रहेगी। जद(यू) प्रमुख बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग लंबे समय से करते रहे हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता वाली बिहार कैबिनेट ने पिछले साल एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने का अनुरोध किया था। तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा राज्य में किए गए जाति सर्वेक्षण के निष्कर्षों के कारण फिर से यह मांग की गई थी। हालांकि केंद्र सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह 14 वें वित्त आयोग की सिफारिश के मद्देनजर किसी भी राज्य से ‘‘विशेष श्रेणी का दर्जा’’ की मांग पर विचार नहीं करेगी।

जद(यू) के वरिष्ठ नेता और बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, ‘‘जद(यू) राजग में है और इसमें बना रहेगा। लेकिन बिहार की वित्तीय स्थिति और अर्थव्यवस्था से संबंधित कुछ मांगें हैं जिन्हें केंद्र द्वारा संबोधित करने की आवश्यकता है।’’ चौधरी ने कहा था, ‘‘बिहार अपने वित्त का प्रबंधन स्वयं कर रहा है। हम देश के सबसे गरीब राज्यों में से हैं। हम जद(यू) बिहार के लिए विशेष राज्य का दर्जा और विशेष पैकेज की अपनी मांग पर कायम हैं।’’