हजारों गंध सेकंड में पहचानेगी ई-नोज
दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने एक कृत्रिम सूंघने की प्रणाली विकसित की है, जो इंसानी नाक की तरह हजारों गंध में फर्क कर सकेगी। यह तकनीक मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क पर आधारित है और यह कई सेंसरों के संकेतों को मिलाकर गंध की पहचान करती है। यह भविष्य में स्मार्ट मशीनों की मदद करेगी।

डायगू, एजेंसी। दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कृत्रिम सूंघने की प्रणाली) यानी इलेक्ट्रॉनिक नोज विकसित की है, जो इंसानी नाक की तरह हजारों गंध में फर्क कर सकेगी। यह तकनीक डायगू ग्योंगबुक इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने विकसित की है। उन्होंने सिस्टम में मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (एमओएफ) नाम के मटीरियल का इस्तेमाल किया है। यह बेहद छोटे-छोटे छिद्रों वाला पदार्थ है, जो गंध के अणुओं को पकड़ सकता है। नाक की तरह यह तकनीक भी कई सेंसर से मिले संकेतों को मिलाकर गंध की पहचान करती है। एआई इन संकेतों के पैटर्न को सीखकर हजारों तरह की गंधों में अंतर कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पारंपरिक सेंसर में गंध पहचानने की क्षमता, गति और अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने जैसी सीमाएं थीं। भविष्य में यह तकनीक ऐसी स्मार्ट मशीनें बनाने में मदद कर सकती है, जो इंसानों की तरह गंध को समझ सकें।
इलेक्ट्रॉनिक नोज कहां आएगी काम
यह सांस या शरीर से निकलने वाली गंध के जरिये बीमारियों का पता लगाएगी, भोजन की ताजगी और खराब होने की जांच करेगी, प्रदूषण और खतरनाक गैसों का पता लगाएगी, जहरीली गैसों की पहचान करेगी, फसलों और मिट्टी की स्थिति समझेगी व मशीनों को आसपास के रासायनिक संकेत पहचानने की क्षमता देगी।


