तीनपानी से काठगोदाम हाईवे पर शो-पीस बने एनएचएआई के एसओएस बूथ
हल्द्वानी में नेशनल हाईवे पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए एसओएस बूथ पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहे हैं। यात्रियों को आपातकालीन मदद देने के लिए बनाए गए ये बूथ काम नहीं कर रहे। एनएचएआई के अधिकारी ने कहा है कि बंद बूथों की जांच की जाएगी और उन्हें ठीक किया जाएगा।

हल्द्वानी। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन मदद के लिए तीनपानी से लेकर काठगोदाम हाईवे तक लाखों रुपये की लागत से लगाए गए एसओएस बूथ पूरी तरह शो-पीस साबित हो रहे हैं। आपके अपने अखबार ‘हिंदुस्तान’ टीम ने हाईवे पर अलग-अलग चार जगहों पर लगे एसओएस बूथों का रियलिटी चेक किया गया, जिसमें एक भी बूथ काम करता हुआ नहीं मिला। दुर्घटना या आपातकाल के समय राहगीरों को तुरंत मदद पहुंचाने का यह दावा जमीन पर पूरी तरह फेल नजर आ रहा है। इस मामले पर एनएचएआई के परियोजना निदेशक अचल जिंदल ने कहा कि बंद पड़े एसओएस बूथों की जांच कराई जाएगी और इन्हें जल्द दुरुस्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक यह सेवा बहाल नहीं होती, तब तक लोग किसी भी आपातकालीन स्थिति में हाईवे हेल्पलाइन नंबर 1033 पर कॉल कर सकते हैं。
क्या है एसओएस बूथ सेवा
हाईवे पर सफर के दौरान आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाने के लिए ये आधुनिक इमरजेंसी बूथ लगाए जाते हैं। कई बार हाईवे के कुछ हिस्सों में मोबाइल नेटवर्क नहीं होता, या दुर्घटना के वक्त पीड़ित का मोबाइल गुम या क्षतिग्रस्त हो जाता है। ऐसे में यह बूथ सड़क किनारे फंसे यात्रियों के लिए लाइफलाइन का काम करते हैं। इन बूथों के जरिए राहगीर सीधे हाईवे कंट्रोल रूम से जुड़ जाते हैं। इसके माध्यम से किसी भी हादसे, गाड़ी खराब होने, मेडिकल इमरजेंसी या सुरक्षा से जुड़े खतरे की स्थिति में तुरंत एम्बुलेंस, क्रेन या पुलिस की मदद ली जा सकती है।
कैसे काम करती है तकनीक
सड़क किनारे लगे एसओएस बूथों को बेहद आसान और आधुनिक तकनीक से लैस किया जाता है ताकि कोई भी आम व्यक्ति इसका इस्तेमाल कर सके। बूथ पर एक प्रेस टू टॉक बटन होता है। इसे दबाते ही बिना किसी नंबर को डायल किए सीधे एनएचएआई के नजदीकी कंट्रोल रूम में कॉल लग जाती है। जैसे ही यूजर बटन दबाता है, कंट्रोल रूम के कंप्यूटर स्क्रीन पर उस एसओएस बूथ की सटीक लोकेशन फ्लैश हो जाती है। इससे कंट्रोल रूम को यह ढूंढना नहीं पड़ता कि दुर्घटना किस जगह हुई है। इन बूथों के ऊपर सोलर पैनल लगे होते हैं, जिससे ये 24 घंटे बिजली की सप्लाई न होने पर भी काम कर सकते हैं।


