सरकारी स्कूलों के सोशल ऑडिट का कार्य हुआ शुरू
युवा लीड::::डिट के दौरान कमेटी के अधिकारी व साथ में एचएम डॉ. जेपी ज्योति। बेगूसराय, हमारे प्रतिनिधि। जिले के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए...

बेगूसराय, हमारे प्रतिनिधि। जिले के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सामाजिक अंकेषण (सोशल ऑडिट) शुरू हो गया है। जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले के चयनित लगभग 20 प्रतिशत प्राथमिक, मध्य, उच्च, उत्क्रमित उच्च विद्यालयों तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) का सामाजिक अंकेषण कराया जाएगा। पूरी प्रक्रिया ग्राम पंचायत से लेकर प्रखंड और जिला स्तर तक चरणबद्ध तरीके से संचालित होगी।
अंकेक्षण प्रक्रिया
इसी कड़ी में विगत चार दिनों से सांख संकुल के मध्य विद्यालय सांख, उच्च माध्यमिक विद्यालय सांख, मकतब सांख, मकतब तरैया, प्राथमिक विद्यालय मुबारकपुर, नवसृजित विद्यालय तरैया और उत्क्रमित मध्य विद्यालय तुलसीपुर में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लक्ष्य के अनुरूप समग्र शिक्षा अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं का अंकेक्षण किया जा रहा है। मध्य विद्यालय सांख के प्रधानाध्यापक सह संकुल समन्वयक डॉ.जेपी ज्योति ने बताया कि विभागीय स्तर से अंकेक्षण कार्य के लिए सदर प्रखंड बेगूसराय समेत बरौनी, वीरपुर,साहेबपुर कमाल व अन्य प्रखंडों के विद्यालयों के अलावा ग्राम पंचायत की विभिन्न योजनाओं का भी अंकेषण किया। अंकेक्षण दल में संतोष कुमार, मधु कुमारी, शबनम कुमारी, शोभा कुमारी रही। सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने अंकेषण दल को सहयोग किए।
जांच की अवधि
छह दिनों तक होगी जांच जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार प्रत्येक पंचायत में पांच सदस्यीय सामाजिक अंकेषण दल गठित किया गया हु। यह दल संबंधित पंचायत के सभी चयनित विद्यालयों में लगातार छह दिनों तक रहकर जांच करेगा। सामाजिक अंकेषण के दौरान विद्यालयों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत जांच होगी। इसमें बिजली, पेयजल, शौचालय, बेंच-डेस्क, विद्यालय की साफ-सफाई, भवन की स्थिति, मध्यान्ह भोजन, छात्रों को पाठ्यपुस्तक, पोशाक और छात्रवृत्ति का वितरण, शिक्षकों की उपस्थिति, छात्रों की नियमित उपस्थिति तथा विद्यालय प्रबंधन समिति की सक्रियता का आकलन किया जाएगा। अभिभावकों, ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों से भी फीडबैक लिया जाएगा।
अंकेक्षण दल की स्वतंत्रता
पूरी तरह स्वतंत्र होगा अंकेक्षण दल आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सामाजिक अंकेषण दल पूरी तरह स्वतंत्र रूप से कार्य करेगा। किसी अधिकारी, कर्मचारी या जनप्रतिनिधि का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। अंकेक्षण के दौरान टीम के ठहरने की व्यवस्था जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा) द्वारा की जाएगी। जहां टीम रुकेगी वहां बिजली, पानी, शौचालय और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। विद्यालयों में छह दिनों तक जांच पूरी होने के बाद एक सप्ताह के भीतर प्रखंड स्तर पर जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। इसमें विद्यालय प्रधान, शिक्षक, अभिभावक, पंचायत प्रतिनिधि, संबंधित अधिकारी तथा आम ग्रामीण भाग लेंगे। जनसुनवाई में सामाजिक अंकेषण दल प्रत्येक विद्यालय की रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करेगा। रिपोर्ट पर खुली चर्चा होगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों से जवाब लिया जाएगा। जनसुनवाई के लिए कमेटी गठित की जाएगी। इसमें जिलाधिकारी द्वारा नामित अधिकारी, वरिष्ठ नागरिक, शिक्षा विभाग के अधिकारी, सोशल ऑडिट सोसायटी के प्रतिनिधि, सीएलएफ प्रतिनिधि, सिविल सोसायटी संगठन के सदस्य तथा विद्यालय शिक्षा समिति के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। यही कमेटी शिकायतों की सुनवाई करेगी और आवश्यक कार्रवाई के लिए अनुशंसा करेगी।
रिपोर्ट का निस्तारण
रिपोर्टर:प्रवीण कुमार विभाग को भेजी जाएगी रिपोर्ट सामाजिक अंकेषण के दौरान प्राप्त शिकायतों का निस्तारण पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर पर किया जाएगा। जनसुनवाई के बाद तैयार प्रतिवेदन संबंधित विभागों को भेजा जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर कमियों को दूर करने, जिम्मेदारी तय करने और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी


