Delhi News: 'साइलेंट विलेज' में तीन बहनों ने घर-घर तिरंगा पहुंचाया
Delhi News: जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के धड़कई गांव की तीन बहनों ने हर घर तिरंगा अभियान के तहत 150 से अधिक राष्ट्रीय ध्वज वितरित किए हैं। उनकी इस उपलब्धि पर पिता ने गर्व प्रकट किया। गांव में 90 से अधिक लोग बोलने और सुनने में अक्षम हैं, जो इसे 'साइलेंट विलेज' बनाते हैं।

Delhi News: जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हर घर तिरंगा अभियान पिता ने कहा-बेटियों की इस उपलब्धि पर गर्व
भदरवाह, (जम्मू-कश्मीर)। देश के साइलेंट विलेज के नाम से मशूहर डोडा जिले में धदकई की तीन बहनों ने हर घर तिरंगा अभियान के तहत अपने गांव के घर-घर में राष्ट्रीय ध्वज पहुंचाकर इसे सफल बनाया है।
तिरंगा वितरण का प्रयास
26 वर्षीय रेशमा बीबी, 24 वर्षीय परवीन कौसर और 22 वर्षीय सायरा खातून गांव में 150 से अधिक राष्ट्रीय ध्वज बांट चुकी हैं। तीनों ने पिता से जिद कर कपड़ा मंगाया और फिर तिरंगा बनाकर गांव में लोगों तक पहुंचाया। पिता रेहम अली ने कहा कि मुझे बेटियों की इस उपलब्धि पर गर्व है। उन्होंने बताया कि बेटियों ने तिरंगा बनाने के लिए संकल्प जताया और इसके लिए कपड़ा लाने की जिद की थी, जिसे उन्होंने पूरा किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि वे वर्ष 2022 से शुरू हर घर तिरंगा अभियान के बारे में जानते थे, लेकिन उनके गांव तक यह अभियान नहीं पहुंचा था।
गांव की स्थिति
गांव के पूर्व सरपंच 75 वर्षीय हाजी अब्दुल लतीफ ने बताया कि तीनों बहनों ने तिरंगा झंडा उन्हें दिया। उन्होंने बताया कि इस पहल ने दूरस्थ गांव में गर्व की भावना पैदा की है। लतीफ के अनुसार, बेटियों ने इतना दृढ़ संकल्प दिखाया और पूरे गांव को गौरवान्वित किया। उनका प्रयास दूसरों को प्रेरित करेगा।
90 से अधिक लोग बोलने-सुनने में अक्षम
साइलेंट विलेज की जानकारी
धड़कई गांव सड़क संपर्क से वंचित है और यहां करीब दो हजार लोग रहते हैं। इनमें 90 से अधिक लोग जन्म से बोल और सुन नहीं सकते हैं। इस कारण इसे साइलेंट विलेज भी कहा जाता है। यहां रहने अधिकतर लोग आदिवासी गुज्जर समुदाय से हैं।
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इस गांव के 90 से अधिक लोग जन्मजात रूप से सुनने और बोलने में असमर्थ हैं, जिसके कारण इसे 'साइलेंट विलेज' के नाम से जाना जाता है।
तब तक खाना खाने से इनकार कर दिया, जब तक उनके पिता उन्हें राष्ट्रीय ध्वज बनाने के लिए कपड़ा नहीं दिला देते।
तीन बहनों की जिद थी कि उनके पिता उन्हें कपड़ा दिलाएं, ताकि वे उससे तिरंगे बना सकें और इन तिरंगों को स्वतंत्रता दिवस से पहले अपने गांव में लोगों के बीच बांट सकें।
रेशमा बीबी (26), परवीन कौसर (24) और सायरा खातून (22) अब तक 150 से अधिक तिरंगे बांट चुकी हैं। उन्होंने देशभर में चल रहे 'हर घर तिरंगा' अभियान में शामिल होकर यह सुनिश्चित करने में मदद की है कि गांव के हर घर तक राष्ट्रीय ध्वज पहुंचे।
सामान्य प्रश्न
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