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जलन में अश्लील तस्वीरें वायरल कर रहीं सहेलियां और बहनें

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डाह लड़कियों को डंस रही है। इतनी बुरी तरह कि वे रिश्तों और दोस्ती को भी आग लगा रही हैं। गोरखपुर में पिछले चार महीने में अश्लील तस्वीरें वायरल कर बदनाम करने के मामलों में आधे कांड पीड़ित लड़कियों की ममेरी-फुफेरी बहनों या सहेलियों ने किए हैं। ऐसा करने की वजहें बेहद छोटी हैं। मसलन, लड़की का ज्यादा सुंदर होना, कपड़ों पर कमेंट कर देना, प्रेमी पर डोरे डालने का शक होना। जांच में उनके चेहरे उजागर हुए तो दोनों परिवारों के हाथ-पांव फूल गए। ऐसे सभी मामले माफीनामे से निपटाए गए हैं। पुलिस की साइबर सेल के आंकड़ों ने यह भयावह तस्वीर पेश की है।

इन सभी मामलों में अश्लील फोटो फोटो शॉप के सहारे तैयार की गई हैं। पीड़िताओं के चेहरे, अश्लील मुद्रा वाले फोटो पर लगा कर इन्हें सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। हर मामले में फोटो शॉप की कारस्तानी में लड़कियों ने किसी और का सहयोग नहीं लिया। खुद अश्लील फोटो तैयार की और फेक फेसबुक अकाउंट बना कर वायरल कर दिया। एक बार अश्लील तस्वीर फेसबुक पर आई तो इलाके के हर फोन पर घूमने लगी। इस तरह पीड़िताओं या उनके परिजनों को इसका पता चला।

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केस एक 
गोरखनाथ क्षेत्र की रहने वाली 16 वर्षीय छात्रा की आपत्तिजनक तस्वीर जनवरी में फेसबुक पर वायरल हुई। व्यापारी पिता ने पुलिस से सम्पर्क किया। कैलीफोर्निया स्थित फेसबुक हेड आफिस से डिटेल मांग कर जांच शुरू हुई तो पता चला कि तस्वीर उसकी फुफेरी बहन ने पोस्ट की थी। यह कारस्तानी करने वाली लड़की लखनऊ में रह कर सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी कर रही है। पूछताछ में पता चला कि उसे छोटी बहन की सुंदरता से जलन थी। इस खुलासे ने दोनों परिवारों को दंग कर दिया। मामला परिवार का होने के नाते माफीनामा लिखवा कर केस बंद कर दिया गया है।

केस दो
पीपीगंज क्षेत्र की एक युवती की फेसबुक पर आपत्तिजनक तस्वीर मार्च में पोस्ट हुई थी। वायरल तस्वीर जब उसके परिजनों को मिली। पुलिस में शिकायत हुई। फेसबुक से डिटेल मांगने के बाद जांच हुई तो आईपी एड्रेस रिश्ते की बुआ के फोन का निकला। वह लखनऊ में एक पुलिस अफसर के फालोअर की बेटी है। पुलिस ने दबोचा तो उसने कहा कि भतीजी को अपने रूप का बड़ा घमंड है। उसे सबक सिखाने के लिए उसने यह किया। माफी के बाद यह मामला खत्म हुआ।

केस तीन 
अप्रैल में शहर के एक बिल्डर के आफिस में काम करने वाली युवती ने बिल्डर को अपने जाल में फंसाने के लिए कई आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल कर दीं। यह भी ट्रिक से बनाई गई थीं, जिनमें बिल्डर को कई महिलाओं के साथ अंतरंग मुद्रा में दिखाया गया था। जांच में पकड़े जाने के बाद उसने कबूला कि वह बिल्डर को अपने जाल में फंसाना चाहती थी। अश्लील तस्वीरें वायरल करके वह बिल्डर को उसकी पत्नी की नजरों में गिराना चाहती थी। ताकि उनका रिश्ता टूटे और वह बिल्डर की जिंदगी में एंट्री कर ले। लेकिन बिल्डर ने चुप बैठने की जगह शिकायत कर दी। पुलिस ने जब खुलासा किया तो बिल्डर सन्न रह गया। एक महीने बाद ही युवती की शादी होने वाली थी। उसके माफी मांगने के बाद बिल्डर परिवार ने उसे बख्श दिया।

केस चार
15 अप्रैल को रुस्तमपुर में किराये का कमरा लेकर रह रही डांस टीचर की आपत्तिजनक फर्जी तस्वीरें वायरल हुईं। जांच में आईपी एडद्येस उसकी रूम मेट का ही निकला। यह हरकत करने वाली लड़की भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। पूछताछ में उसने बताया कि डांस टीचर के प्रेमी के कहने पर उसने ऐसा किया था। 

केस पांच
3 मई को देवरिया की शादीशुदा महिला ने पति की से संबंधों के शक में खोराबार के भगत चौराहे पर रहने वाली युवती की फर्जी अश्लील तस्वीरें वायरल कर दीं। यह युवती एक बाइक एजेंसी में काम करती थी। उसने पुलिस में शिकायत की तो जांच में महिला के बारे में पता चला। अंतत: इस मामले में भी सुलह हुई।

केस छह
अप्रैल में बड़हलगंज की एक शादीशुदा महिला की एक युवती ने ही फेक नाम से फेसबुक आईडी बना दी है। उसने ऐसा क्यों किया है यह सामने नहीं आया है, टीम अभी इस मामले की जांच कर रही है।

फेसबुक के हेड ऑफिस से मांगी जाती डिटेल 
आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट करने वालों की जानकारी जुटाने के लिए साइबर सेल को अमेरिका के कैलीफोर्निया स्थित हेड आफिस से सम्पर्क करना पड़ता है। वहां से मेल पर डिटेल आने में 7-8 दिन लगते हैं। फेसबुक से आईपी एड्रेस मिलने के बाद यहां संचार कंपनियों से उस आईपी एड्रेस पर चल रहे डिवाइस का पता करते हैं। तब जाकर आरोपी का पता चलता है। 

ऐसे बन रही आपत्तिजनक तस्वीर 
चेहरा असली और गर्दन के नीचे का हिस्सा किसी आपत्तिजनक तस्वीर से जोड़कर नई तस्वीर बनाई जा रही है। यही नहीं तस्वीर के साथ आपत्तिजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। मोबाइल पर मौजूद कई तरह के एप इस तरह की तस्वीर बनाने में मदद कर रहे हैं। मोबाइल से ही इन्हें पोस्ट भी किया जा रहा है।

करीबी होने पर पीछे हट जाते पीड़ित  
आपत्तिजनक तस्वीर वायरल करने के मामले में पिछले एक साल में 13 युवक जेल जा चुके हैं लेकिन लड़कियां एक भी मामले में जेल नहीं गई हैं। करीबी या फिर रिश्तेदार होने की वजह से मामले समझौतों से निपट जाते हैं। 

एसपी क्राइम आलोक कुमार वर्मा ने बताया कि साइबर सेल की जांच में ऐसे तमाम मामले सामने आ रहे हैं जिनमें लड़कियां ही लड़की को बदनाम करने के लिए ऐसा अपराध कर रही हैं। इसमें ज्यादातर सहेलियां, फेमिली फ्रेंड या रिश्तेदार हैं। यह पुलिस के लिए ही नहीं समाज के लिए भी नई तरह की चुनौती है।

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