ट्रेंडिंग न्यूज़

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

हिंदी न्यूज़ देशधर्मांतरण सिख धर्म के लिए भी बड़ी चुनौती: पूर्व CJI केहर

धर्मांतरण सिख धर्म के लिए भी बड़ी चुनौती: पूर्व CJI केहर

पूर्व CJI ने भाई वीर सिंह द्वारा 1890 के अंत में लिखे गए उपन्यास "सुंदरी" के बारे में भी बात की।यह एक हिंदू लड़की और उसके भाई बलवंत सिंह की कहानी है, जिसमें महिला सिख धर्म में शामिल होने को तय करती है

धर्मांतरण सिख धर्म के लिए भी बड़ी चुनौती: पूर्व CJI केहर
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 02 Dec 2022 10:26 AM

इस खबर को सुनें

0:00
/
ऐप पर पढ़ें

देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस (सेवानिवृत्त) जे एस केहर ने कहा है कि आज भी सिख धर्म उन्हीं चुनौतियों का सामना कर रहा है जैसा भाई वीर सिंह के समय में था। प्रसिद्ध सिख विद्वान भाई वीर सिंह की 150वीं जयंती पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए पूर्व CJI ने कहा कि सिख धर्म भाई वीर सिंह के समय की उन्हीं तीन चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनका उन्होंने भी सामना किया था। 

उन्होंने आधुनिकीकरण, पौराणिकता और धर्मांतरण को सिख समुदाय के लिए बड़ी चुनौतियों के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा, “भाई वीर सिंह आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने अपने समय में थे। जितना अधिक हम उनसे सीखेंगे, उतना ही अधिक हम वर्तमान में सामना कर रहे संघर्षों से निपटने में सक्षम होंगे।"

भाई वीर सिंह की 150 वीं जयंती भाई वीर सिंह साहित्य सदन (बीवीएसएस) सोसाइटी द्वारा साहित्य अकादमी, दिल्ली और दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी परिसर में श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज के सहयोग से मनाई जा रही है। सिख विद्वान का जन्म 1872 में हुआ था और उनकी मृत्यु 1957 में हुई थी।

न्यायमूर्ति केहर ने भाई वीर सिंह के बारे में ब्रिटैनिका एनसाइक्लोपीडिया का हवाला देते हुए कहा, "ऐसे समय में उन्होंने ये लिखा जब सिख धर्म, राजनीति और पंजाबी भाषा पर अंग्रेजों और हिंदुओं का कड़ा प्रहार हो रहा था और सिखों ने अपने जीवन के तरीके के मूल्य पर संदेह करना शुरू कर दिया था। जस्टिस केहर ने कहा कि अपनी बहुमुखी कलम से भाई वीर सिंह ने सिखों के साहस, दर्शन और आदर्शों की प्रशंसा की। 

न्यायमूर्ति केहर ने भाई वीर सिंह द्वारा 1890 के अंत में लिखे गए उपन्यास "सुंदरी" के बारे में भी बात की। यह एक हिंदू लड़की और उसके भाई बलवंत सिंह की कहानी है, जिसमें महिला सिख धर्म में शामिल होने का निर्णय लेती है। उन्होंने कहा, "भाई वीर सिंह ने महिला को एक स्वतंत्र निर्णय निर्माता के रूप में चित्रित किया है।" 

पंजाब कला परिषद के अध्यक्ष और कवि डॉ सुरजीत पातर ने भाई वीर सिंह के बारे में उनकी एक कविता के जरिए यह समझाने की कोशिश की कि उनकी विचार प्रक्रिया कैसी थी? पातर ने कहा कि भाई वीर सिंह का जन्म उस समय हुआ जब अंग्रेज़ पंजाब को नियंत्रित कर रहे थे। पातर ने कहा, "उनके लेखन में दर्द झलकता है।"

बीवीएसएस के निदेशक डॉ मोहिंदर सिंह ने कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के एक संदेश को पढ़कर सुनाया। पूर्व पीएम ने संदेश ने कहा,“भाई वीर सिंह को आधुनिक पंजाबी साहित्य के जनक के रूप में याद किया जाता है। उनके लेखन ने आधुनिक पंजाब में प्रमुख भूमिका निभाई है।"