जमुई: हस्तकरघा रोजगार सम्मान और स्वालंबन का आधार
जमुई में 'हस्तकरघा का महत्व: सामाजिक आर्थिक विकास में इसका योगदान' विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। प्राचार्य डॉ. गौरी शंकर पासवान ने कहा कि हस्तकरघा भारत की पहचान है और इसके उत्पादों का विकास आवश्यक है। यह रोजगार, सम्मान और स्वालंबन का प्रतीक है, जो पर्यावरण के अनुकूल वस्तुएं निर्मित करता है।

जमुई से सुधांशु की रिपोर्ट राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस के अवसर पर 'हस्तकरघा का महत्व: सामाजिक आर्थिक विकास में इसका योगदान' विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता आर. डी. महाविद्यालय ई. अलीगंज के प्राचार्य डॉ.गौरी शंकर पासवान ने की।अपने अध्यक्षीय प्रबोधन में बोलते हुए प्राचार्य डॉ. गौरीशंकर पासवान ने कहा कि हस्तकरघा उत्पाद का बढ़ावा और विकास वर्तमान समय की पुकार है। क्योंकि हैंडलूम भारत की पहचान, कारीगर उसकी शान और स्वदेशी उसका स्वाभिमान है। हस्तकरगा रोजगार, सम्मान और स्वालंबन का बेहतर आधार है। हस्तकरघा हमारी विरासत है तथा उसकी संरक्षण सबकी जिम्मेदारी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में आधुनिक तकनीक के युग में भी हैंडलूम और उससे निर्मित वस्तुओं का महत्व कम नहीं हुआ है।
सामाजिक आर्थिक विकास में इसका महत्व पूर्ण योगदान है। हैंडलूम और उससे उत्पादित वास्तुओ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पर्यावरण के अनुकूल होती हैं। टिकाऊ और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी होती है। इसलिए हमें हैंडलूम उत्पादों को ही खरीदना चाहिए और स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए।


