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कर्नाटक में रहने वाले हर किसी को सीखनी चाहिए कन्नड़, सीएम सिद्धारमैया ने ऐसा क्यों कहा

सिद्धारमैया ने कहा, 'मैं कहूंगा कि यह राज्य की भाषा, संस्कृति और परंपरा के विकास के लिए अच्छा बदलाव नहीं है। यहां रहने वाले हर व्यक्ति को कन्नड़ बोलना सीखना चाहिए। यह हमारी भी जिम्मेदारी है।'

कर्नाटक में रहने वाले हर किसी को सीखनी चाहिए कन्नड़, सीएम सिद्धारमैया ने ऐसा क्यों कहा
Niteesh Kumarभाषा,बेंगलुरुTue, 17 Oct 2023 09:26 PM
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कन्नड़ भाषा के विकास के लिए अनुकूल माहौल की कमी पर मंगलवार को अफसोस जताया। इस दौरान उन्होंने पूर्ववर्ती 'मैसूर राज्य' के एकीकरण के 68 साल और राज्य को 'कर्नाटक' नाम मिलने के 50 साल बीते जाने का जिक्र किया। कन्नड़ भाषियों को बहुत अधिक उदार बताते हुए सीएम ने कहा कि यह कमी कन्नड़ भाषा, इसकी संस्कृति और परंपराओं के विकास में बाधा बन रही है। सिद्धरमैया ने आज 'कर्नाटक सुवर्ण संभ्रम' का लोगो भी जारी किया। 

इस मौके पर सीएम सिद्धारमैया ने कहा, 'हम दूसरों को अपनी भाषा नहीं सिखाते, बल्कि हम उनकी भाषा सीखते हैं। हमें दूसरों को अपनी भाषा सिखानी चाहिए। हम उर्दू बोलने वालों के साथ उर्दू में बात करते हैं, हिंदी बोलने वालों के साथ हिंदी में बात करते हैं और तमिल लोगों के साथ तमिल में बात करते हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'मैं कहूंगा कि यह राज्य की भाषा, संस्कृति और परंपरा के विकास के लिए अच्छा बदलाव नहीं है। यहां रहने वाले हर व्यक्ति को कन्नड़ बोलना सीखना चाहिए। हमारी भी जिम्मेदारी है कि हम कन्नड़ के लिए माहौल और आवश्यकता बनाएं, लेकिन हमने ऐसा प्रयास नहीं किया।'

कन्नड़ जाने बिना भी यहां आसानी से गुजारा: सिद्धारमैया
कर्नाटक के सीएम ने कहा कि कोई भी कन्नड़ जाने बिना यहां आसानी से गुजारा कर सकता है। सिद्धरमैया ने कहा, 'क्या हम तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल या उत्तर प्रदेश में केवल कन्नड़ में बात करके गुजारा कर सकते हैं? हालांकि, कर्नाटक में कोई भी कन्नड़ जाने बिना ऐसा कर सकता है। पड़ोसी राज्यों की तुलना में हमारे यहां यही अंतर है। हम कन्नड़ काफी उदार हैं।' उन्होंने कहा कि वह लोगों को अन्य भाषाएं सीखने या बोलने से मना नहीं करेंगे। मगर, उन्हें यह एहसास होना चाहिए कि कर्नाटक में कन्नड़ बोलने के लिए माहौल बनाने की जरूरत है और इसे ध्यान में रखना आवश्यक है।

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