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लंबे समय से आतंकियों के निशाने पर थे शुजात बुखारी, पहले भी हुआ था हमला

शुजात बुखारी

‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी पर सन 2000 में भी आतंकियों ने हमला किया था। हालांकि उस समय वे बाल-बाल बच गए थे। इस हमले के बाद से ही जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उन्हें सुरक्षा उपलब्ध करा रखी थी। 

शुजात बुखारी से आतंकी इसलिए काफी नाराज थे कि वह घाटी में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में जोर-शोर से लगे थे। वह इस संबंध में कई सम्मेलनों का आयोजन करा चुके थे। वह पाकिस्तान के साथ परदे के पीछे (ट्रैक-2) प्रक्रिया के भी हिस्सा थे। 

आतंकियों ने हत्या के लिए इफ्तार का समय चुना

 जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एस.पी. वैद ने कहा कि बुखारी की हत्या के लिए आतंकियों ने इफ्तार का समय चुना। इस समय रोजेदार रोजा खोलने के लिए अपने घर पहुंचने की हड़बड़ी में होते हैं। पुलिस हमलावरों की पहचान कर रही है और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

गृहमंत्री की बैठक के बाद हमला

 इस हमले से चंद घंटे पहले ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अगले महीने शुरू होनेवाली अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की थी। फिलहाल घाटी में केंद्र की ओर से पवित्र रमजान के महीने में ‘संघर्ष विराम’ लागू किया गया है। 
सूत्रों ने बताया कि राजनाथ सिंह की ‘संषर्घ विराम’ के रूप में घाटी में शांति की पहल ईद के आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। ईद शनिवार को है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने संकेत दिया है कि यह पहल केवल ईद के लिए ही है। गृह मंत्रालय द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, कश्मीर घाटी में रमजान के दौरान आतंकी घटनाओं में 100 प्रतिशत से भी अधिक की बढोतरी हुई है। 

प्रतिक्रियाएं

राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी हत्या कायरतापूर्ण कृत्य है। यह हमला कश्मीर के विचारवान आवाज को खत्म करने का प्रयास है। वह एक साहसी और निडर पत्रकार थे। उनकी हत्या से मैं बहुत ही दुखी और सदमे में हूं। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के प्रति है। 
राजनाथ सिंह, गृहमंत्री 

‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी की हत्या की खबर सुनकर दुखी हूं। वह बहादुर इंसान थे जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में न्याय और शांति के लिए निर्भीक होकर लड़ाई लड़ी। उनके परिवार के प्रति संवेदना है। बुखारी की कमी महसूस होगी।
- राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष 

ईद के पहले आतंक का खूंखार चेहरा फिर सामने आया है। हम इस तरह की हिंसा की निंदा करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। 
- महबूबा मुफ्ती, जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री

मैं बहुत सदमे हूं और शोक व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। शुजात को जन्नत में शांति मिले और इस दुख की घड़ी में उनके प्रियजनों को दुख सहने का साहस मिले।
- उमर अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री 

रमजान के पवित्र महीने में शुजात बुखारी की दिमागहीन आतंकी हमले में हमले में की गई हत्या की प्रेस क्लब ऑफ इंडिया घोर निंदा करती है। इससे पता चलता है कि पत्रकारों की सुरक्षा को बड़ा खतरा है। घाटी में शांति बहाली की दुश्मन ताकतों ने शांति की एक आवाज को खामोश कर दिया है। 
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का बयान

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  • Web Title:Shujaat Bukhari was on target of terrorists for long time