अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में गरीब एससी-एसटी बच्चों को नहीं मिलीं किताबें, नालंदा समेत 22 स्कूलों के 1364 छात्र प्रभावित
बिहार के सरकारी अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में 22 विद्यालयों के 1364 एससी-एसटी छात्रों को नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बावजूद किताबें नहीं मिलीं हैं। नालंदा के छात्रों की स्थिति गंभीर है। शिक्षा विभाग ने तुरंत किताबें उपलब्ध कराने का आदेश दिया है, लेकिन इससे पहले भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।

अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में गरीब एससी-एसटी बच्चों को नहीं मिलीं किताबें, नालंदा समेत 22 स्कूलों के 1364 छात्र प्रभावित 91 में से 22 डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक पाठ्य-पुस्तकों का टोटा, नया सत्र शुरू फिर भी बच्चे किताबों को तरसे
नालंदा के अलावा 15 जिलों में संकट
नालंदा के अलावा बेगूसराय, वैशाली, सारण, कैमूर, बक्सर, औरंगाबाद, गया, कटिहार, किशनगंज सहित 15 जिलों में संकट, शिक्षा परियोजना परिषद ने जिलों को भेजा सख्त आदेश कैमूर के कुदरा और मुजफ्फरपुर के पोखरैरा स्कूल सबसे बदहाल, कक्षा 1 में अकेले 292 बच्चे किताब से वंचित अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभाग की समीक्षा में खुली पोल, जिला कल्याण पदाधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल
भविष्य की योजनाएं
बीईपी के राज्य परियोजना निदेशक ने डीईओ व डीपीओ को दिया निःशुल्क किताबें तत्काल उपलब्ध कराने का आदेश फोटो : राजगीर एससी-एसटी : राजगीर का एससी-एसटी स्कूल। बिहारशरीफ, कार्यालय संवाददाता। एससी-एसटी स्कूलों बच्चों की शिक्षा को लेकर किये जा रहे दावों की पोल एक सरकारी पत्र ने ही खोल दी है। नालंदा समेत राज्य में संचालित कुल 91 डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में से 22 विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं को नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने के बावजूद अब तक निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। 22 विद्यालयों के 1,364 बच्चे किताबों से वंचित हैं। इनमें सबसे ज्यादा कक्षा एक के 292 बच्चे शामिल हैं। इसके बाद कक्षा दो के 199, कक्षा तीन के 172, कक्षा पांच के 170, कक्षा चार के 139, कक्षा छह के 149, सातवीं के 131 और आठवीं के 112 बच्चे बिना पुस्तकों के पढ़ाई कर रहे हैं। नालंदा जिले के डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय हरनौत की पहली कक्षा में पढ़ने वाले 30 छात्रों को किताबें नहीं मिली हैं। हालांकि, कक्षा दो से आठ तक के बच्चों को किताबें मिल चुकी हैं। कई स्कूलों का हाल काफी खराब : सबसे बदहाल स्थिति कैमूर जिले के कुदरा विद्यालय की है, जहां कक्षा सात में 32, कक्षा छह में 30 और कक्षा चार के 27 बच्चों को किताबें नहीं मिलीं। वहीं, औरंगाबाद विद्यालय में हर कक्षा में औसतन 20 से 25 बच्चे प्रभावित हैं। गया के महकार विद्यालय में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां कक्षा एक में 39, कक्षा छह में 36 और कक्षा तीन में 31 बच्चे किताब विहीन हैं। मुजफ्फरपुर के पोखरैरा विद्यालय में कक्षा एक के 29 और बेतिया के कदमहवा बगहा-2 विद्यालय में कक्षा एक के 40 बच्चे प्रभावित हैं। इसके अलावा वैशाली, कटिहार, बक्सर, दरभंगा, खगड़िया, नालंदा, सारण, पश्चिम चम्पारण और किशनगंज के विद्यालय भी इस सूची में शामिल हैं। यह गड़बड़ी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की निदेशक प्रियंका रानी की विभागीय समीक्षा में पकड़ी गई। संबंधित जिला कल्याण पदाधिकारियों के संज्ञान में यह बात आई कि शिक्षा विभाग के माध्यम से मिलने वाली निःशुल्क पुस्तकें कई विद्यालयों तक नहीं पहुंचीं। इसके बाद विभाग ने 7 अगस्त को पत्र भेजकर बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (बीईपीसी) को स्थिति से अवगत कराते हुए संबंधितों को निर्देशित करने का अनुरोध किया। इस पर बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक धर्मेंद्र कुमार ने 9 सितंबर को बेगूसराय, वैशाली, सारण, कैमूर, नालंदा, बक्सर, औरंगाबाद, पूर्वी चम्पारण (मोतिहारी), खगड़िया, दरभंगा, पश्चिम चम्पारण (बेतिया), गया, कटिहार, किशनगंज और मुजफ्फरपुर के डीईओ व एसएसए डीपीओ को पत्र जारी किया। पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि संलग्न सूची के विद्यालयों को आवश्यकतानुसार निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकें तत्काल उपलब्ध कराते हुए इसकी रिपोर्ट विभाग को सौंपी जाए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले भी कई बार ऐसे निर्देश जारी किए जा चुके हैं। बावजूद, इसकी स्थिति में सुधार नहीं हो पायी, जो जिला स्तर पर निगरानी तंत्र की सुस्ती को उजागर करता है।


