Shahjahnpur News: फर्जी चरित्र प्रमाणपत्र से लिए ठेके, मथुरा कंस्ट्रक्शन पर मुकदमा
Shahjahnpur News: शाहजहांपुर, वरिष्ठ संवाददाता। नगर निगम के टेंडरों में मथुरा कंस्ट्रक्शन द्वारा फर्जी चरित्र प्रमाणपत्र लगाने के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ है। जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए, जिसके आधार पर फर्म की निविदाएं स्वीकृत हुईं और संबंधित कार्यों का भुगतान किया गया। अब धनराशि वसूली की तैयारी की जा रही है。

Shahjahnpur News: शाहजहांपुर, वरिष्ठ संवाददाता। नगर निगम के टेंडरों में फर्जी चरित्र प्रमाणपत्र लगाकर काम हासिल करने के मामले में मथुरा कंस्ट्रक्शन के खिलाफ सदर थाने में मुकदमा दर्ज हो गया। जांच में 2023 और 2026 में लगाए गए दो चरित्र प्रमाणपत्र जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से जारी होना नहीं पाए गए। खास बात यह है कि फर्म की निविदाएं न्यूनतम दर होने पर स्वीकृत हुईं, उसे काम आवंटित हुए और संबंधित कार्यों के बिलों का भुगतान भी किया गया।
फर्म के खिलाफ कार्रवाई
नगर निगम के मुख्य अभियंता आशीष त्रिवेदी ने 10 सितंबर को सदर थाने में तहरीर देकर मथुरा कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर प्रदीप कुमार गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। तहरीर के अनुसार वित्तीय 2025-26 में वार्ड पांच चिनौर में श्यामतगंज गौटिया से संबंधित सीसी सड़क और नाली निर्माण के टेंडर में फर्म ने 23 दिसंबर 2023 का चरित्र प्रमाणपत्र संख्या 420 लगाया था। बाद के टेंडरों में 16 जनवरी 2026 का 687 नंबर प्रमाणपत्र भी लगाया गया। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह की जांच में दोनों प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। 2023 की चरित्र प्रमाणपत्र पंजिका में 416 तक ही प्रमाणपत्र जारी हुए थे, जबकि 420 नंबर का प्रमाणपत्र रिकॉर्ड में नहीं था। इसी तरह 2026 की पंजिका में 22 अगस्त तक 247 नंबर तक प्रमाणपत्र जारी हुए थे, जबकि फर्म ने 687 नंबर का प्रमाणपत्र लगाया था।
गलत भुगतान की स्थिति में वसूली
तहरीर में बताया गया है कि फर्म की निविदाएं न्यूनतम दर होने पर स्वीकृत हुईं और उसे अलग-अलग सड़क व नाली निर्माण के काम मिले। काम पूरा होने के बाद बिल-वाउचर नगर निगम में प्रस्तुत किए गए और कार्यों पर खर्च धनराशि का भुगतान भी किया गया। अब डीएम ने गलत भुगतान या धनराशि के गबन की स्थिति में वसूली के निर्देश दिए हैं।
डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने 8 सितंबर को नगर आयुक्त को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इनमें फर्जी दस्तावेज लगाने पर अलग-अलग एफआईआर, फर्म की सुनवाई के बाद 15 दिन में ब्लैकलिस्टिंग, गलत भुगतान की स्थिति में वसूली और टेंडर के दौरान प्रमाणपत्रों का सत्यापन न कराने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा गया था। नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी ने भी मुख्य अभियंता को तकनीकी बिड जांचने वाले अधिकारी-कर्मचारियों का उत्तरदायित्व तय कर 15 कार्यदिवस में विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
सवाल: आखिर तकनीकी जांच में पकड़ क्यों नहीं आया
मामले में अब सवाल सिर्फ फर्म के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है। डीएम ने टेंडर के दौरान लगाए गए अभिलेखों और प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं कराने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। नगर आयुक्त ने तकनीकी बिड का परीक्षण करने वाले संबंधित अधिकारी-कर्मचारी का उत्तरदायित्व तय कर विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया 15 कार्यदिवस में पूरी करने को कहा है। यानी फर्जी प्रमाणपत्र टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने के बाद भी तकनीकी जांच में नहीं पकड़े गए।
फर्जी प्रमाणपत्र की जांच
मथुरा कंस्ट्रक्शन ने अलग-अलग टेंडरों में दो चरित्र प्रमाणपत्र लगाए। 23 दिसंबर 2023 का 420 नंबर प्रमाणपत्र जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से जारी नहीं होना पाया गया। इसी तरह 16 जनवरी 2026 का 687 नंबर प्रमाणपत्र भी कार्यालय की पंजिका में दर्ज नहीं मिला। जांच में दोनों प्रमाणपत्र कूटरचित पाए गए। इससे मामला किसी एक दस्तावेज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग समय में लगाए गए प्रमाणपत्रों की जांच तक पहुंच गया।
फर्जी कागजों पर मिले काम का भुगतान भी, अब वसूली की तैयारी
फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर निविदाओं में भाग लेने के बाद मथुरा कंस्ट्रक्शन की न्यूनतम दर वाली निविदाएं स्वीकृत हुईं और उसे निर्माण कार्य आवंटित किए गए। कार्यों के बिल-वाउचर नगर निगम में लगाए गए और भुगतान भी हुआ। डीएम ने अब निर्देश दिया है कि प्रकरणों की जांच में यदि धनराशि के गलत भुगतान या गबन की स्थिति सामने आती है तो संबंधित से धनराशि की वसूली की जाए। इस तरह एफआईआर के साथ सरकारी धन की रिकवरी का पहलू भी जांच में शामिल हो गया है।
20 जून की शिकायत के बाद 11 सितंबर को मुकदमा
तिलहर के वार्ड 11 के सभासद कय्यूम खान ने 20 जून को मथुरा कंस्ट्रक्शन के टेंडरों में फर्जी प्रमाणपत्रों की शिकायत की थी। इसके बाद नगर निगम से संबंधित निविदा प्रपत्र मंगाए गए और प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया। 3 सितंबर की जांच रिपोर्ट में छह प्रमाणपत्रों को संबंधित कार्यालय से निर्गत नहीं होना और कूटरचित बताया गया। 8 सितंबर को डीएम ने एफआईआर समेत पांच बिंदुओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद नगर आयुक्त के निर्देश पर मुख्य अभियंता ने 10 सितंबर को सदर थाने में तहरीर दी, जिस पर मुकदमा दर्ज किया गया।
तिलहर में भी मथुरा कंस्ट्रक्शन पर दर्ज है मुकदमा
मथुरा कंस्ट्रक्शन के खिलाफ फर्जी चरित्र प्रमाणपत्र का यह दूसरा मुकदमा है। इससे पहले तिलहर नगर पालिका के टेंडरों में फर्जी चरित्र प्रमाणपत्र लगाने के मामले में अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार की तहरीर पर ठेकेदार प्रदीप कुमार गुप्ता के खिलाफ तिलहर थाने में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। जांच में 2023 का चरित्र प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया था। आरोप है कि फर्म ने विभिन्न निर्माण और आपूर्ति कार्यों के टेंडरों में फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर भाग लिया और न्यूनतम दर होने के कारण काम हासिल किए। काम होने के बाद बिल-वाउचर लगाए गए और भुगतान भी किया गया।


