भांजी से दुष्कर्म में 20 साल की सजा, एक लाख का जुर्माना
शाहजहांपुर की विशेष न्यायालय ने सौरभ दीक्षित को 20 वर्ष की कठोर कारावास, एक लाख रुपये का जुर्माना सुनाया। मामला 2019 का है जब आरोपी ने एक नाबालिग को बहला-फुसलाकर अगवा किया। पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ और कोर्ट ने सबूतों के आधार पर सौरभ को दोषी माना, जबकि उसके पिता और भाई को मुक्त कर दिया।

शाहजहांपुर। रिश्तों को शर्मसार करने वाले बहुचर्चित दुष्कर्म मामले में अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट कक्ष संख्या 8 प्रेम शंकर ने सजा सुनाई है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी दिलीप सिंह चौहान की प्रभावी पैरवी के बाद अदालत ने सौरभ दीक्षित को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास, एक लाख रुपये के जुर्माना लगाया। तथा जुर्माने की संपूर्ण राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया। वहीं साक्ष्य के अभाव में आरोपी के पिता और भाई को दोषमुक्त कर दिया गया। मामला वर्ष 2019 का है। अभियोजन के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 22 फरवरी 2019 को कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि उनकी नाबालिग पुत्री अपनी मौसी को देखने के लिए कपूर अस्पताल गई थी, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटी।
काफी तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चला। पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी पुत्री घर से एक लाख रुपये, जेवर और शैक्षिक प्रमाणपत्र भी साथ ले गई थी। उन्होंने संदेह जताया कि उनके चचेरे साले सौरभ दीक्षित का घर में आना-जाना था। वह बहला-फुसलाकर उसे अपने साथ ले गया है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने सौरभ दीक्षित के साथ उसके पिता और भाई को भी सहयोग करने का आरोपी मानते हुए न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान सभी गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का कोर्ट द्वारा परीक्षण किया गया। न्यायालय ने पाया कि सौरभ दीक्षित के विरुद्ध पॉक्सो अधिनियम और दुष्कर्म के आरोप प्रमाणित होते हैं, जबकि उसके पिता और भाई के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।


