Sexual harassment of children: Supreme Court said it seems the law is not afraid - बच्चों का यौन उत्पीड़न: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, लगता है कानून का डर नहीं रहा DA Image
22 नवंबर, 2019|6:36|IST

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बच्चों का यौन उत्पीड़न: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, लगता है कानून का डर नहीं रहा

the supreme court also issued notice to the state government and said that all actions taken pursuan

देश में बच्चों का यौन उत्पीड़न रोकने के लिए कानून कड़ा करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने जैसे कई कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक आंकड़ा बताता है कि 1994 से 2016 के बीच बच्चों के दुष्कर्म की घटनाएं 400 फीसदी तक बढ़ गईं है। यह हाल तब है जब बड़ी संख्या में ऐसी घटनाएं रिपोर्ट नहीं होती है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले पर खुद ही संज्ञान लेना पड़ा है। बच्चों से रेप की बढ़ती घटनाओं से चिंतित सुप्रीम कोर्ट को यहां तक कहना पड़ा कि लगता है कानून का कोई डर नहीं रह गया है।

यूपी में सबसे गंभीर हालात : बच्चों के यौन उत्पीड़न को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पहल पर तैयार सूची में उत्तर प्रदेश 3457 मुकदमों के साथ सबसे ऊपर है। यूपी ऐसे कांड में ही आगे नहीं, बल्कि पुलिस भी ढीले रवैये में भी सबसे आगे है, यहां 50 फीसदी से ज्यादा केसों में 1779 में जांच चल रही है जो बेहद ढीली है। मध्यप्रदेश 2389 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर है और यहां तेजी से जांच कर 1841 केसों में चार्जशीट पेश हो गई है। वहीं नौ मुकदमों के साथ नगालैंड सबसे नीचे है। 

सुप्रीम कोर्ट आहत :  मुख्य न्यायाधीश ने शुक्रवार को कहा कि मीडिया में आ रही आए दिन बच्चों से बलात्कार की घटनाओं से आहत होकर सुप्रीम रजिस्ट्री से आंकड़े जुटाने को कहा गया था। कोर्ट ने कहा था कि पूरे देश में पहली जनवरी से 30 जून के बीच ऐसे मामलों में दर्ज एफआईआर और की गई कानूनी कार्रवाई के आंकड़े जुटाए जाएं। रजिस्ट्री ने देश के सभी हाइकोर्ट से आंकड़े मंगाए और याचिका तैयार की।

शर्मनाक: छह महीने में बच्चों के साथ दुष्कर्म के 24 हजार मामले

यौन दुर्व्यवहार में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर
एनसीआरबी की 2016 रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों के साथ शारीरिक दुर्व्यहार के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। जम्मू-कश्मीर में महज दो मामले ऐसे आए। एनसीआरबी ने 2017 और 2018 की रिपोर्ट जारी नहीं की है। 

कहां कितनी घटनाएं
उत्तर प्रदेश             2,652
महाराष्ट्र                 2,370
मध्य प्रदेश            2,106
दिल्ली                  769
हरियाणा               346
झारखंड                 81
उत्तराखंड                36
बिहार                    26
जम्मू-कश्मीर            2


पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले 
2016 में बच्चों के साथ घटी 1,06,958 घटनाओं में 36,022 मामले पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज 
4,954 मामले के साथ यूपी शीर्ष पर, महाराष्ट्र में 4,815, और मध्य प्रदेश में 4,717 मामले दर्ज
1,620 मामले दर्ज हुए दिल्ली में, बिहार में 233, झारखंड 348, उत्तराखंड 218, हरियाणा 1020
34.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई बाल यौन शोषण के मामले में 


मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा रेप
मध्य प्रदेश            2,467
महाराष्ट्र                 2,292
उत्तर प्रदेश            2,115
दिल्ली                 813
बिहार                  170
झारखंड               205
उत्तराखंड              291
जम्मू-कश्मीर        21
नगालैंड                 21 


22 साल में चार गुना बढ़ोतरी
1994 में बच्चियों से रेप की 3,986 घटनाएं सामने आई थीं
2016 में यह 4.2 गुना बढ़कर 16,863 हो गईं

न्याय की धीमी रफ्तार
ट्रायल और न्याय की धीमी रफ्तार की वजह पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया है। आबादी के अनुपात में पुलिस और जजों की संख्या में भारी कमी है। 

454 लोगों के लिए एक पुलिस अधिकारी होना चाहिए संयुक्त राष्ट्र के मानक के मुताबिक 
514 लोगों के लिए एक पुलिस अधिकारी है भारत में गृह मंत्रालय के 2016 के आंकड़ों के मुताबिक 
10 लाख लोगों के लिए 19 जज हैं, यूएन के मानक के मुताबिक 50 होनी चाहिए
(स्रोत: कानून मंत्रालय, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट)

2016 के दिसंबर तक दुष्कर्म के 1.33 लाख केस लंबित थे 
90 हजार 205 मामलों की सुनवाई लंबित थी पॉक्सो एक्ट के तहत
25.5% दुष्कर्म के मामले ट्रायल में आए
29.6% केस में पॉक्सो के तहत सजा सुनाई गई
(स्रोत: एनसीआरबी)

घटनाएं रोकने के लिए पहल
पॉक्सो एक्ट के तहत मामला: बच्चों के साथ बलात्कार के मामले पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज किए जाते हैं। इस कानून में दोषियों के लिए 10 साल से लेकर आजीवन उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।

फांसी की सजा हो सकेगी
बच्चों के साथ यौन अपराध करने वालों को अब फांसी की सजा दी जा सकेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ही पॉक्सो कानून 2012 में जरूरी संशोधनों को मंजूरी दी है। इसमें बाल पोर्नोग्राफी पर लगाम लगाने के लिए सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है। 

फास्ट ट्रैक कोर्ट 
यौन उत्पीड़न के मामलों की जल्द सुनवाई के लिए सरकार ने 18 राज्यों में 1023 फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इनमें महिला के यौन उत्पीड़न और बाल अपराधों से जुड़े पॉक्सो एक्ट के मामलों की सुनवाई होगी। 

यहां सजा-ए-मौत 
चीन, नाइजीरिया, कांगो, पाकिस्तान, ईरान, सऊदी अरब, यमन और सूडान में बाल अपराधियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान है। 

यहां जेल की सजा
देश        सजा
मलेशिया        30 साल
सिंगापुर          20 साल 
फिलीपींस        40 साल
ऑस्ट्रेलिया      25 साल
कनाडा            14 साल
जर्मनी             10 साल 
दक्षिण अफ्रीका   20 साल 
अमेरिका        राज्यों के अलग-अलग प्रावधान
इंग्लैंड        उम्रकैद 


दो तिहाई बच्चे जानकारी साझा नहीं करते
- 70 फीसदी बच्चे यौन शोषण की जानकारी साझा नहीं करते
- 93 फीसदी यौन शोषण की शिकार बच्चियां ग्रामीण इलाकों की है 
- 20 फीसदी बच्चे गंभीर यौन उत्पीड़न के शिकार होते हैं
- 12447 बच्चों के साथ की बातचीत के बाद निकले ये नतीजे 
(नेशनल एकेडमी ऑफ साइकोलॉजी में 2013 में प्रकाशित शोध के मुताबिक)

दुष्कर्म के मामलों से दहला देश
कठुआ गैंगरेप: बहुचर्चित कठुआ गैंगरेप और हत्या मामले ने देश को झकझोर दिया था, जिसमें आठ साल की बच्ची से पिछले साल हुई दरिंदगी हुई थी। 
भोपाल रेप कांड: 7 जून को आठ साल की मासूम को अगवा कर उसके साथ बलात्कार कर गला घोंट हत्या कर दी गई थी। इस घटना में अदालत ने 32 दिनों में फैसला सुना दिया। 
जयपुर गैंगरेप: राजस्थान की राजधानी जयपुर में 1 जुलाई को सात साल की बच्ची से गैंगरेप का मामला गर्माया हुआ है। 

 

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