माननीयों की नूराकुश्ती में पिस रही राघोपुर की जनता
ऊर्जा मंत्री का गांव और पथ निर्माण मंत्री का क्षेत्र है राघोपुर सांसद अजय कुमार

भागलपुर, मुख्य संवाददाता। एक तरफ गंगा की उफनती लहरें आशियाने और आस्था के केंद्रों को लील रही हैं, तो दूसरी तरफ सूबे के ‘माननीयों’ के बीच श्रेय लेने की राजनीति चल रही है। खरीक प्रखंड का राघोपुर गांव इस समय भीषण कटाव की आग में जल रहा है। विडंबना यह है कि यह क्षेत्र ऊर्जा मंत्री का गृह ग्राम है। पथ निर्माण मंत्री का विधानसभा क्षेत्र है। सांसद अजय कुमार मंडल का सबसे मजबूत वोट बैंक रहा है। बावजूद इसके संकट के समय जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया गया, जिससे ग्रामीणों में तीनों माननीयों के खिलाफ भारी गुस्सा है। राघोपुर की जनता का साफ कहना है कि कागजी हेल्पलाइन और राहत के चंद पैकेट उनके जीवन भर की कमाई की भरपाई नहीं कर सकते। उन्हें उनके घरों और भविष्य की स्थायी सुरक्षा चाहिए। इस गांव में कटाव की विभीषिका इतनी भयानक है कि देखते ही देखते 100 साल पुराना ऐतिहासिक चैती दुर्गा मंदिर और हनुमान मंदिर का एक बड़ा हिस्सा गंगा नदी में समा गया। इस घटना ने सदियों पुरानी आस्था पर चोट की, जिससे ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट गया। अब स्थिति यह है कि जमींदारी तटबंध, पास से गुजर रही रेलवे लाइन और हजारों रिहायशी घरों पर अस्तित्व का खतरा मंडरा रहा है。
क्षेत्र का जायजा
क्षेत्र का जायजा लेने मंगलवार देर रात राघोपुर पहुंचे सांसद अजय कुमार मंडल ने सीधे तौर पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा, राघोपुर में जो कटावरोधी कार्य कराया गया, वह बिना किसी ठोस व्यवस्था के हुआ। विभाग में सिर्फ ठेकेदारों को बचाने और पैसे का खेल चल रहा है। इस लापरवाही के कारण ही आज मंदिर और ग्रामीणों के घर नदी में विलीन हो रहे हैं। मैं इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग करता हूं, जिसमें दोषी अधिकारी बख्शे नहीं जाएंगे। पीएम-सीएम को पत्र लिखेंगे।
बूलो मंडल की चुप्पी
बूलो मंडल की चुप्पी पर भी सवाल उठने लगा है। राघोपुर क्षेत्र से जुड़े गोपालपुर विधायक सह ऊर्जा मंत्री बूलो मंडल की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आने को लेकर भी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। कटाव से बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने के बीच उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाये जा रहे हैं। तटबंध टूटने के दिन बुलो मंडल घर में थे। इसके बाद वे दोबारा गांव नहीं आए, न इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया ही दे रहे। स्थानीय विधायक सह पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेन्द्र तटबंध टूटने के दो दिन बाद गांव आए। जिस दिन बांध टूटा था, वे अजगैवीनाथ धाम में पूजा कर रहे थे। इस मुद्दे पर सक्रियता दिखाते हुए मंत्री ने कहा है कि सरकार प्रभावित लोगों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है, हालांकि आपदा के समय आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से ज्यादा जरूरी लोगों की जान-माल की रक्षा करना है। मामला बिगड़ने के बाद अब वे तटबंध पर मौजूद होकर कटाव प्रभावितों के प्रति सहानुभूति जता रहे हैं। उनके दौरे पर गांव के युवकों ने व्यंग्यात्मक मीम्स बनाए हैं। जो सोशल प्लेटफार्म पर खूब वायरल होने लगा है।
ग्रामीणों की सुनवाई
सुनिए बाढ़-कटाव पीड़ितों का दर्द, उनकी ही जुबानी
नदी किनारे खड़े अपनी आंखों के सामने आशियाना उजड़ते देख रहे स्थानीय निवासी सुनील मंडल भर्राई आवाज में कहते हैं, अगर प्रशासन ने समय रहते कटावरोधी कार्य सही ढंग से कराया होता, तो आज मां दुर्गा का मंदिर और हमारा गांव इस तरह तबाह न होता। जब कटाव बढ़ रहा था, तब कोई नेता मुंह दिखाने नहीं आया। अब जब सब कुछ गंगा में समा रहा है तो नेता और अधिकारी फोटो खिंचवाने और जांच का नाटक करने आ रहे हैं। हमारे वोट से बड़े-बड़े पदों पर बैठे माननीयों ने हमें मरने के लिए छोड़ दिया है। ग्रामीण रमेश कुमार रोते हुए कहते हैं, हमलोग घर का सामान समेटकर ऊंचे स्थानों पर भाग रहे हैं। खेती की जमीन पहले ही चली गई, अब रहने की छत भी छीन रही है। सरकार के इंजीनियरों की लापरवाही के कारण तटबंध कमजोर हुआ। हमें आश्वासन नहीं, अपने आशियाने की स्थायी सुरक्षा चाहिए।
प्रशासन की अलर्ट स्थिति
प्रशासन पूरी तरह अलर्ट, सहायता नंबरों को जारी किया
चौतरफा दबाव के बाद, जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन की नींद खुली है। वर्तमान में टूटे हुए राघोपुर-नरकटिया तटबंध को बचाने के लिए बालू की बोरियों और बांस-बल्ले के सहारे युद्धस्तर पर फ्लड फाइटिंग कार्य शुरू किया गया है। बाढ़ और भीषण कटाव की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। डीएम ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर ग्रामीणों से ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की है। प्रभावित ग्रामीणों की मदद, राहत सामग्री, सामुदायिक रसोई की जानकारी या आपातकालीन रेस्क्यू के लिए प्रशासन ने सहायता के लिए आधिकारिक दूरभाष नंबरों को जारी किया है।
राज्य आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम: 06122217305
डीएम कार्यालय : 06412402200 या 9473191381
एसपी नवगछिया : 06421223343 या 9031828030
पुलिस कंट्रोल रूम : 06412400701
डीडीसी : 06412303284 या 9031071392
एडीएम : 06412400891 या 9473191382


