दून मेडिकल कॉलेज में फिर रैगिंग : कॉमन ग्लास से पानी पीने पर जूनियर पीजी डॉक्टर को सीनियर्स ने धमकाया

हिन्दुस्तान, देहरादून
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दून मेडिकल कॉलेज में फिर रैगिंग : कॉमन ग्लास से पानी पीने पर जूनियर पीजी डॉक्टर को सीनियर्स ने धमकाया

दून मेडिकल कॉलेज में फिर रैगिंग : कॉमन ग्लास से पानी पीने पर जूनियर पीजी डॉक्टर को सीनियर्स ने धमकाया
दून मेडिकल कॉलेज में फिर रैगिंग : कॉमन ग्लास से पानी पीने पर जूनियर पीजी डॉक्टर को सीनियर्स ने धमकाया

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। एनाटॉमी विभाग के एक प्रथम वर्ष के पीजी डॉक्टर ने अपने ही विभाग के तृतीय वर्ष के सीनियर डॉक्टरों पर लगातार टॉक्सिक व्यवहार करने, डराने-धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। सीनियर्स की इस प्रताड़ना से आजिज आकर जूनियर डॉक्टर ने सीधे राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग से गुहार लगाई है। बताया गया है कि हाल ही में 19 अगस्त को घटना हुई। आरोप है कि एनाटॉमी विभाग के डिसेक्शन हॉल में ड्यूटी के दौरान पीजी प्रथम वर्ष के छात्र ने एक कॉमन ग्लास से पानी पी लिया था, जिसका इस्तेमाल वहां मौजूद सभी लोग करते थे। पीड़ित का आरोप है कि इसी बात पर सीनियर भड़क गए और उसे धमकाया, प्रताड़ित किया गया। एक मनगढ़ंत कहानी बनाकर उसी के खिलाफ एचओडी से शिकायत कर दी। जब विभाग स्तर पर जूनियर डॉक्टर की कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उसने परेशान होकर अपनी मां को पूरी बात बताई। मां ने मामले को सुलझाने के लिए सीनियर से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। मानसिक रूप से बेहद तनाव में आ चुके पीड़ित ने एनएमसी में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। दिल्ली से निर्देश आते ही दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया है。

जांच के बाद होगी सख्त कार्रवाई : प्राचार्य

दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। पीड़ित छात्र ने कॉलेज स्तर पर कोई शिकायत नहीं की थी और न ही एचओडी की ओर से मुझे इसकी कोई जानकारी दी गई। एनएमसी से शिकायत मिलते ही मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच तुरंत एंटी रैगिंग सेल को सौंप दी गई है। दोनों पक्षों और शिक्षकों के बयान दर्ज कर रिपोर्ट मांगी गई है, जिसके आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सिस्टम पर सवाल : आखिर प्रबंधन और एंटी रैगिंग सेल कर क्या रही है?

दून मेडिकल कॉलेज में हो रही ये घटनाएं व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। गौरतलब है कि दून मेडिकल कॉलेज में इस साल यह रैगिंग की तीसरी घटना है। इससे पहले इसी साल जनवरी में जूनियर छात्रों को बेल्ट, चप्पलों से पीटने का बड़ा मामला सामने आया था। तब प्रशासन ने दो सीनियर छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित कर उन पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था, जबकि सात अन्य छात्र निलंबित हुए थे। अप्रैल के महीने में भी जूनियर छात्रों के उत्पीड़न और उन पर बाल कटवाने का दबाव बनाने की शिकायत सामने आई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था, विभागों के भीतर संवाद की कमी, एंटी रैगिंग सेल और अनुशासन समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे है।

सामान्य प्रश्न

✦क्या दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की घटना हुई है?−
हां, दून मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है।
Chand Mohammad

लेखक के बारे में

Chand Mohammad

शॉर्ट बायो : चांद मोहम्मद पिछले 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान में देहरादून यूनिट में बतौर वरिष्ठ संवाददाता कार्य कर रहे है।


परिचय एवं अनुभव

चांद मोहम्मद हिंदी पत्रकारिता में एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 11 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान अखबार में देहरादून में कार्यरत है और हेल्थ रिपोर्टिंग कर रहे है। वह पिछले आठ साल से हिंदुस्तान से जुड़े है। स्वास्थ्य रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ है।


करियर का सफर

चांद ने अपने करियर की शुरुआत 2015 में अमर अखबार देहरादून से की। जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2018 में उन्होंने हिंदुस्तान ज्वाइन किया। वर्तमान में वह हेल्थ, मेडिकल एजुकेशन, मौसम, मुस्लिम कम्युनिटी रिपोर्टिंग के अलावा देहरादून हिंदुस्तान में सह सिटी प्रभारी और सह अपराध संवाददाता की भूमिका में है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग

चांद बी कॉम और पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट है। वह यूपी के मुजफ्फरनगर के छोटे से गांव भंगेला से है। समाज के वंचित लोगों की आवाज उठाने, मरीजों की पीड़ा बयां करना उनका एक जज्बा बयां करता है। कोविड के दौरान उन्होंने पीड़ा बताती और सिस्टम पर प्रहार करती रिपोर्टिंग की। मेडिकल रिसर्च और हेल्थ से जुड़े विषयों पर उन्होंने काफी काम किया है। लगातार जागरूकता परक और रिसर्च बेस्ड स्टोरी हेल्थ और मौसम पर करते है।


विजन

चांद का विजन है कि वह अपने जर्नलिज्म से आम आदमी के मुद्दों को उठाए और उन्हें हल कराए। पाठकों के बीच अखबार की विश्वसनीयता बनाए रखे।


विशेषज्ञता

स्वास्थ्य रिपोर्टिंग, सामाजिक मुद्दों, मौसम, मुस्लिम कम्युनिटी के मामलों के जानकार है।

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