आईएएस डॉ. मनीष ने एआई पर लिखी 8 पुस्तकों की शृंखला
रांची के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. मनीष रंजन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विभिन्न पहलुओं पर आधारित आठ पुस्तकों की श्रृंखला जारी की है। इन पुस्तकों में एआई की बुनियादी बातें, रोजगार, मानवीय रिश्ते और आगामी चुनौतियों जैसे विषय शामिल हैं। ये पुस्तकें प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं।

रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़े विभिन्न सवालों के बीच वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. मनीष रंजन ने एआई के विविध पहलुओं पर आधारित आठ पुस्तकों की एक विस्तृत शृंखला तैयार की है। इसमें एआई की बुनियादी अवधारणाओं से लेकर रोजगार, मानव जीवन, रिश्तों, डीपफेक, सत्य, एआई गवर्नेंस और भविष्य की कार्य संस्कृति जैसे विषयों को शामिल किया गया है, जो प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं। पहली पुस्तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: कॉन्सेप्ट्स ऐंड एप्लिकेशंस’ एआई की मूल अवधारणा और रोजमर्रा के जीवन में इसके उपयोग को समझाती है। दूसरी पुस्तक ‘एआई फॉर एवरीवन’ यह सवाल उठाती है कि एआई समानता लाएगा या नया विभाजन पैदा करेगा।
तीसरी पुस्तक ‘द फ्यूचर ऑफ ह्यूमन्स इन द एज ऑफ एआई’ मशीनों के बीच मानव जीवन, शिक्षा और समाज के भावी स्वरूप को रेखांकित करती है। चौथी पुस्तक ‘20 करियर्स दैट विल विन बाय 2033’ भविष्य के उन कौशलों की पहचान कराती है जो इंसानों को अपरिहार्य बनाए रखेंगे। पांचवीं पुस्तक ‘द न्यू साइकोलॉजी ऑफ लव’ एआई द्वारा हमारे निजी व सामाजिक रिश्तों में आ रहे बदलावों का विश्लेषण करती है। छठी पुस्तक ‘एआई ऐंड द वॉर फॉर ट्रुथ’ डीपफेक, भ्रामक जानकारियों और साइबर अपराधों से उत्पन्न चुनौतियों से रूबरू कराती है। सातवीं पुस्तक ‘विल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इनस्लेव ह्यूमन्स बाय 2033?’ मानव नियंत्रण और मशीनी क्षमताओं के बीच की होड़ का विश्लेषण करती है, जबकि आठवीं पुस्तक ‘विन द एआई डिकेड’ आने वाले दशक में सफलता की व्यावहारिक रणनीतियां प्रस्तुत करती है।


