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2 जुलाई, 2020|1:24|IST

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सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को सौंपी लद्दाख में जारी चीन की चालबाजी की पूरी रिपोर्ट, 6 जून को है लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बैठक

security agencies submitted detailed report to government of china tactics in ladakh

लद्दाख में चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। इसमें पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों की गतिविधियों की जानकारी दी गई है। सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि रिपोर्ट में दौलत बेग ओल्डी और पोंगोंग सेक्टर में चीनी सैनिकों द्वारा किए गए निर्माण कार्य का जिक्र किया गया है। 

सरकार को इस बात से भी अवगत कराया गया है कि कैसे चीन ने अपने सैनिकों की संख्या इस इलाके में बढ़ाने के लिए निर्माण कार्य किया है। 

मई को पहले सप्ताह से चीन ने एलएसी से सटे पूर्वी लद्दाख इलाके में पांच हजार से भी अधिक चीनी सैनिकों की तैनाती की है। इसके बाद भारत ने भी भारी संख्या में अपने फौज की तैनाती सीमा पर कर दी है।

यह भी कहा जा रहा है कि एलएसी के कुछ इलाकों में चीनी सैनिक भारत की सीमा के अंदर आ चुके हैं। दोनों देश के सैनिकों के बीच कई बार झड़प भी हुई है। इसके बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई है। चीनी सैनिक भारतीय सीमा के काफी अंदर घुसना चाहते थे, लेकिन भारतीय फौज ने उन्हें रुकने पर मजबूर कर दिया।

भारत-चीन को छह जून को होने वाली लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बैठक से स्थिति सामान्य होने क उम्मीद है। भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए चीन को साफ शब्दों में कह दिया है कि हम शांति के पक्षधर हैं, लेकिन सीमा के साथ कोई समझौता नहीं होगा।

6 जून को है लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारियों की बातचीत
पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को हल करने के लिए भारत और चीन के सैन्य प्रतिनिधियों के बीच वार्ता मंगलवार को बेनतीजा रही। सूत्रों के मुताबिक अगली बैठक छह जून को होगी। सूत्रों ने बताया कि मेजर जनरल रैंक अफसरों के बीच डिवीजन कमांडर स्तरीय वार्ता मंगलवार दोपहर को हुई लेकिन इसमें कोई नतीजा नहीं निकल सका।

वार्ता शुरू होने से पहले उत्तरी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी भी जमीनी हालात की समीक्षा के लिए लद्दाख पहुंच गए थे। सूत्रों ने बताया कि बैठक में कोई खास सफलता नहीं मिली, इस वजह से दोनों देशों के सैन्य नेतृत्व के बीच एक और वार्ता छह जून को होगी। भारतीय सेना प्रमुख एम एम नरवाणे को उम्मीद है कि गतिरोध का समाधान सैन्य स्तरीय वार्ता में निकल आएगा।

सड़क बनाने को लेकर हुआ था विवाद
भारत द्वारा पूर्वी लद्दाख के पांगगोंग त्सो (झील) इलाके में एक खास सड़क और गलवान घाटी में डारबुक-शायोक-दौलत बेग ओल्डी सड़क को जोड़ने वाली एक सड़क को बनाने के प्रति चीन के विरोध से पैदा हुआ था।

पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में गत पांच मई को दोनों देशों के सैनिक लोहे की छड़ों और लाठी-डंडे लेकर आपस में भिड़ गए थे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच पथराव भी हुआ था। इस घटना में दोनों देशों के कई सैनिक घायल हुए थे। इसके बाद, सिक्किम सेक्टर में नाकू ला दर्रे के पास भारत और चीन के लगभग 150 सैनिक आपस में भिड़ गए, जिसमें दोनों पक्षों के कम से कम 10 सैनिक घायल हुए थे।

डोकलाम में 73 दिन तक गतिरोध चला था
दोनों देशों के सैनिकों के बीच 2017 में डोकलाम में 73 दिन तक गतिरोध चला था। भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी पर विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है। वहीं, भारत इसे अपना अभिन्न अंग करार देता है। दोनों पक्ष कहते रहे हैं कि सीमा विवाद के अंतिम समाधान तक सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता कायम रखना जरूरी है।

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