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लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही बिहार की राजनीति में अपने हो रहे हैं 'बेगाने'

लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही बिहार में करीबी हो रहे हैं 'बेगाने' (पीटीआई फाइल फोटो)

बिहार की राजनीति में लोकसभा चुनाव 2019 (Loksabha elections 2019) से पहले कई दलों के करीबी रहे अन्य दल/नेता एक दूसरे से अलग होकर दूसरे से जुड़ रहे हैं। हालांकि, यह कोई नई बात नहीं है, इससे पहले पिछले लोकसभा चुनाव (Loksabha Chunav) में भी बिहार में ऐसा देखा जा चुका है। 

पिछली बार चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के 13 विधायकों ने पार्टी के खिलाफ जाते हुए स्पीकर से संपर्क किया था। इस बार जेडीयू तो एनडीए में है लेकिन एनडीए के पुराने और छोटे दल उससे अलग होकर महागठबंधन में शामिल हो चुके हैं। 

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सबसे पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के हिन्दुस्तान अवाम मोर्चा (HAM) ने खुद को एनडीए से अलग किया और अभी हाल ही में पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) राजग से अलग हो गई।

पटना साहिब से बीजेपी के सांसद शत्रुघन सिन्हा के अलावा दरभंगा से सांसद कीर्ति आजाद भी पिछले काफी समय से  पार्टी के खिलाफ बोलते रहे हैं। वहीं, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कई बार कहा है कि कुछ अन्य नेताओं के जुड़ने की बात की है लेकिन किसी नाम की जानकारी नहीं दी।

वहीं, आरएलएसपी के बागी सांसद अरुण कुमार जिन्हें जहनाबाद सीट से जीत मिली थी, उन्होंने भी अपने अगले कदम के बारे में जानकारी नहीं दी है। कभी जेडीयू के करीब रहे निर्दलीय विधायक बाहुबली अनंद सिंह ने भी महागठबंधन की तरफ आने के अपने इरादों को साफ कर दिया था। हालांकि, तेजस्वी यादव की वजह से वे कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं या फिर मुंगेर सीट से निर्दलीय ही मैदान में उतर सकते हैं। इससे एनडीए को मुश्किल हो सकती है।

साल 2015 में अनंत सिंह ने अपनी गिरफ्तारी का आरोप लालू प्रसाद यादव पर लगाया था। वहीं, साल 2006 में अनंत उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने लालू प्रसाद यादव के यहां पले घोड़े 'पवन' को सोनपुर मेले से ऊंची कीमत में खरीदा था। 

एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज के पूर्व निदेशक डीएम दिवाकर का कहना है कि एक से दूसरे दलों में शामिल होने के पीछे की वजह सिर्फ निजी स्वार्थ होता है। यह अवसरवाद की राजनीति है। इसका कभी कोई सिद्धांत नहीं होता है। इससे पहले भी कई जदयू या फिर बीजेपी में आ जा चुके हैं। 

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  • Web Title:Season of shifting political loyalties on in Bihar as 2019 Lok Sabha polls near