छह नक्सलियों की तलाश में तीन राज्यों की पुलिस, जंगलमहल तक घेराबंदी
सारंडा के जंगलों में सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ने के बाद एक करोड़ के इनामी माओवादी नेता असीम मंडल और उसके साथियों की तलाश अब झारखंड-बंगाल सीमा से आगे जंगलमहल क्षेत्र तक पहुंच गई है। पुलिस ने हाल में कई गिरफ्तारियां की हैं और स्थानीय मददगारों के माध्यम से असीम मंडल का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

सारंडा के जंगलों में सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ने के बाद एक करोड़ के इनामी माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश और उसके साथियों की तलाश अब झारखंड-बंगाल सीमा से आगे जंगलमहल क्षेत्र तक पहुंच गई है। सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली है कि असीम मंडल समेत छह सदस्यीय दस्ता सारंडा से निकलने के बाद पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र में पनाह लेने की कोशिश में है। इस इनपुट के आधार पर झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा पुलिस के बीच संयुक्त अभियान की तैयारी चल रही है। असीम मंडल की तलाश में झारखंड पुलिस पहले ही दलमा और झारखंड-बंगाल सीमा के जंगलों में अभियान चला चुकी है। जुलाई में दलमा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अभियान की सूचना सामने आई थी। अगस्त की शुरुआत में सरायकेला-खरसावां पुलिस ने असीम मंडल के दस्ते से जुड़े तीन इनामी माओवादियों को गिरफ्तार किया। इनसे पूछताछ में असीम मंडल और उसके साथियों की गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की बात सामने आई है।
गिरफ्तारियां और पूछताछ
4 अगस्त को चांडिल-कांड्रा क्षेत्र से मदन महतो, रवि सिंह सरदार और मीना पहाड़िया को गिरफ्तार किया गया था। तीनों पर कुल 22 लाख का इनाम था। पुलिस के अनुसार, तीनों का संबंध असीम मंडल के दस्ते से रहा है। रवि सिंह की निशानदेही पर मदन महतो और मीना पहाड़िया तक पहुंचने की बात सामने आई। इन गिरफ्तारियों के बाद पूछताछ में असीम मंडल, 15 लाख रुपये के इनामी राम प्रसाद मार्डी उर्फ सचिन और अन्य सदस्यों समेत छह सदस्यीय दस्ते की गतिविधियों की जानकारी मिलने की बात सामने आई है। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को पटमदा और बोड़ाम क्षेत्र में ऐसे लोगों के बारे में भी जानकारी मिली है, जिनका इस्तेमाल सूचना पहुंचाने या स्थानीय स्तर पर मदद के लिए किया जाता था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ऐसे स्थानीय मददगारों से दस्ते को भोजन, दवा और इलाके में सुरक्षित आवाजाही से जुड़ी जानकारी मिलने की आशंका है।
मददगारों से जंगल का रास्ता तलाश रही पुलिस
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जंगलों में लंबे समय तक टिके रहने वाले छोटे दस्तों के लिए स्थानीय नेटवर्क महत्वपूर्ण होता है। सारंडा से निकलने के बाद असीम का दस्ता दलमा क्षेत्र की तरफ बढ़ा था। बाद में झारखंड-बंगाल सीमा से लगे जंगलों में उसकी मौजूदगी की सूचना मिली। सुरक्षा कारणों से पुलिस दस्ते के संभावित रास्तों और तलाशी की सटीक दिशा सार्वजनिक नहीं कर रही है। हालांकि, दलमा से झारखंड-बंगाल सीमा और आगे जंगल महल के जंगलों तक संभावित आवाजाही को ध्यान में रखकर तलाशी अभियान की रणनीति बनाई जा रही है।
बंगाल पुलिस के साथ बनेगी संयुक्त रणनीति
असीम मंडल लंबे समय से झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय रहा है। वह वर्तमान में झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल क्षेत्र में सक्रिय प्रमुख माओवादी नेताओं में सबसे बड़ा नाम है। अब असीम और उसके बचे साथियों को पकड़ने के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ नए सिरे से समन्वय बढ़ाने की तैयारी है। असीम का दस्ता लगातार गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों के दबाव से कमजोर हुआ है।


