चलते-चलते-- सूरज ने निगल ली थी सुपर अर्थ
हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
एक नए शोध में तुर्की के एगे विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि सूरज ने अरबों साल पहले पृथ्वी से कई गुना बड़े एक ग्रह को निगल लिया था। इस घटना के निशान सूरज के अंदर मौजूद हो सकते हैं, और सूरज की संरचना इस ग्रह के द्रव्यमान के अनुसार आज भी प्रभावित हो सकती है।

अंकारा, एजेंसी। हमारा सूरज जीवन के लिए जरूरी ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। एक नए शोध में वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि सूरज ने अरबों साल पहले अपनी शुरुआती अवस्था में पृथ्वी से कई गुना बड़े एक ग्रह को निगल लिया था। इन्हें सुपर-अर्थ कहा जाता है। तुर्की के एगे विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस घटना के निशान आज भी सूरज के अंदर मौजूद हो सकते हैं। इन्होंने सूरज के विकास का कंप्यूटर मॉडल तैयार किया। अलग-अलग परिस्थितियों में यह जांच की कि अगर सूरज ने किसी ग्रह को निगल लिया हो तो आज उसकी संरचना कैसी दिखाई देगी।
मॉडल से पता चला कि सूरज की मौजूदा विशेषताओं के साथ सबसे बेहतर मेल उस स्थिति में मिलता है, जब उसने करीब 5 से 10 पृथ्वी के बराबर द्रव्यमान वाले ग्रह को निगला हो। यानी यह ग्रह पृथ्वी से कई गुना ज्यादा भारी रहा होगा।


