scientists of france will save india s birds son chiraiya - फ्रांस के वैज्ञानिक बचाएंगे भारत की सोन चिरैया DA Image
18 नबम्बर, 2019|4:39|IST

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फ्रांस के वैज्ञानिक बचाएंगे भारत की सोन चिरैया

विलुप्त हो रही दि ग्रेड इंडियन बस्टर्ड (सोन चिरैया)  को अब फ्रांस के वैज्ञानिक बचाएंगे। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया(डब्ल्यूआईआई) ने अबु धाबी की मदद से राजस्थान में इसके लिए एक परियोजना शुरू की है। डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिक फ्रांस के वैज्ञानिकों की मदद से इनका संरक्षण करेंगे। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड दुनिया भर में भारत और पाकिस्तान के भारत से सटे कुछ इलाकों में पाई जाती हैं, लेकिन पिछले कुछ दशकों में इनके लगातार शिकार के चलते इनकी संख्या काफी कम हो गई। इस वक्त इनकी संख्या पूरी दुनिया में करीब 125 के आसपास रह गई हैं। ऐसे में विलुप्त हो रही प्रजातियों में इस प्रजाति का नाम काफी ऊपर है। 

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इसे बचाने के लिए डब्ल्यूआईआई पिछले कुछ सालों से काम कर रहा है। इसी के तहत अबु धाबी में इसकी अन्य प्रजातियों पर हो रहे काम के चलते भारत ने उसने मदद मांगी। अबु धाबी ने अपने यहां इस तरह की प्रजातियों के संरक्षण के लिए सालों से काम कर रहे फ्रांस के दो विशेषज्ञ वैज्ञानिकों को मदद के लिए भारत भेजा है। डब्ल्यूआईआई ने राजस्थान में इसके लिए एक विशेष सेंटर बनाया है। जिसमें इनके अंडों का संरक्षण और मानिटरिंग होगी। 

वैज्ञानिकों का कहना है कि दि ग्रेड इंडियन बस्टर्ड मादाओं में कुछ ही अंडे देती हैं और उन्हें दूसरे जानवर खा जाते हैं। जो कि इनके कम होने की एक बड़ी वजह है। 

इन प्रदेशों में बचा है अस्तित्व

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड कभी भारत में पंजाब, मध्य प्रदेश हरियाणा, छत्तीसगढ़, यूपी, उड़ीसा सहित 12-13 राज्यों में काफी संख्या में थी। पिछले दशकों में  लगातार इनकी संख्या कम होती गई। कई राज्यों से ये विलुप्त भी हो गई हैं। अब ये केवल राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में पाई जाती हैं।

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