परिषदीय विद्यालयों में निजी स्कूलों की तर्ज पर होगी पीटीएम
राज्य सरकार ने परिषदीय विद्यालयों में भी पीटीएम का आयोजन करने का निर्देश दिया है। प्रत्येक विद्यालय को 250 रुपये आवंटित किए गए हैं। चार पीटीएम सत्र में आयोजित होंगे और प्रत्येक बैठक की एक निश्चित थीम होगी। प्रधानाध्यापक अभिभावकों के साथ संवाद के लिए विभिन्न तरीकों का उपयोग करेंगे।

निजी विद्यालयों की तरह अब परिषदीय विद्यालयों में भी पीटीएम हुआ करेगी। इसके लिए शासन ने चार पीटीएम एक सत्र में करने के निर्देश देते हुए 250 रुपये प्रत्येक विद्यालय को पीटीएम के लिए धनराशि आवंटित की है। पीटीएम में अभिभावक-शिक्षक सिर्फ बच्चों की पढ़ाई का हाल बताने तक सीमित नहीं रहेगी। बच्चे स्कूल में कैसा कर रहे हैं, नियमित क्यों नहीं आ रहे हैं और पढ़ाई में कहां पीछे हैं, इन सवालों के जवाब अभिभावक और शिक्षक मिलकर तलाशेंगे। बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति, घर का माहौल, सरकारी योजनाओं और स्कूल की व्यवस्थाओं तक पर संवाद कर रोडमैप बनेगा। शैक्षिक सत्र में गुरुजी चार बार अभिभावकों से विशेष रूप से संवाद करेंगे।
राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा
जिनमें पीटीएम को औपचारिकता से आगे बढ़ाकर बच्चों की प्रगति व विद्यालय के विकास से जोड़ने पर जोर दिया गया है। प्रत्येक बैठक में थीम तय की गई है। पहली बैठक की थीम सब पढ़ें सब बढ़ें, दूसरी बैठक अक्तूबर की थीम आज की उपस्थिति कल की प्रगति, तीसरी दिसंबर में होने वाली बैठक की थीम शिक्षा का सफर परिवार के संग और अंतिम चौथी बैठक फरवरी 2027 में मेरा विद्यालय मेरी जिम्मेदारी थीम पर होगी।
वाट्सएप, फोन के अलावा घर-घर संपर्क
करेंगे प्रधानाध्यापक। प्रधानाध्यापक अभिभावकों को कार्ड, पोस्टर, लिखित संदेश, वाट्सएप और फोन से सूचना देंगे। लगातार अनुपस्थित बच्चोंके अभिभावकों से घर-घर संपर्क कर पीटीएम में बुलाएंगे। पीटीएम में बच्चों की शैक्षिक प्रगति, अधिगम स्तर व मूल्यांकन परिणाम पर चर्चा होगी। कमजोर बच्चों के लिए घर पर पढ़ाई का माहौल, नियमित अभ्यास और पठन की आदत विकसित करने की सलाह दी जाएगी। उपस्थित व अनुपस्थिति के कारणों पर भी बात होगी।


