पहले दिन स्कूल पहुंचे बच्चों का रोली-तिलक से हुआ स्वागत
अमेठी। जनपद के परिषदीय विद्यालय पुनः खुल गए हैं। ग्रीष्मावकाश के बाद शिक्षकों ने बच्चों का आत्मीय स्वागत किया। कुल 1,16,851 विद्यार्थियों में से 69,831 बच्चे ही विद्यालय पहुंचे। भीषण गर्मी के कारण बड़ी संख्या में बच्चे अनुपस्थित रहे, जिससे पढ़ाई प्रभावित हुई।

अमेठी। संवाददाता ग्रीष्मावकाश के उपरांत मंगलवार को जनपद के परिषदीय विद्यालय पुनः खुल गए। लंबे अवकाश के बाद विद्यालय पहुंचे बच्चों का शिक्षकों ने रोली-तिलक लगाकर, आरती उतारकर और पुष्पवर्षा कर आत्मीय स्वागत किया। कई विद्यालयों में गुब्बारों एवं रंग-बिरंगी सजावट के माध्यम से उत्सव जैसा माहौल बनाया गया, जिससे बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति
बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में कुल 1,16,851 नामांकित विद्यार्थियों में से 69,831 बच्चे ही विद्यालय पहुंचे, जबकि 47,020 छात्र-छात्राएं अनुपस्थित रहे। पहले दिन उपस्थिति लगभग 60 प्रतिशत के आसपास रही। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि भीषण गर्मी और उमस के कारण बड़ी संख्या में अभिभावकों ने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजा।
विद्यालयों की सजावट और स्वागत
पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय पचेहरी, पश्चिम दुवारा, सवनगी, प्राथमिक विद्यालय दोस्तपुर सहित कई विद्यालयों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। शिक्षकों ने बच्चों को नियमित उपस्थिति, स्वच्छता, अनुशासन एवं मन लगाकर पढ़ाई करने का संदेश दिया। कई विद्यालयों में बच्चों को विशेष अल्पाहार एवं मध्यान्ह भोजन भी उपलब्ध कराया गया। वहीं अमेठी क्षेत्र के खेरौना, कोरारी सहित अधिकांश विद्यालयों में बच्चे कम आए। हथकिला में नौ, जूनियर विद्यालय जरौटा में 10 सहित कई स्कूलों में गिनती के ही छात्र-छात्राएं पहुंचे। सुबह से ही बिजली न होने के कारण शिक्षक और बच्चे गर्मी से बेहाल नजर आए। शिक्षक गमछे से हवा झलते दिखे। कक्षाओं में पंखे न चलने से उमस और बढ़ गई। हालांकि कुछ परिषदीय विद्यालयों में पहले दिन का उत्साह दिखा। प्राथमिक विद्यालय सीतारामपुर, भादर विकास खंड के सवनगी विद्यालय में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने स्कूल पहुंचे छात्र-छात्राओं का रोली टीका लगाकर स्वागत किया। बच्चों को टॉफी और चॉकलेट बांटी गईं।
विद्यालयों की व्यवस्थाएं
विद्यालय खुलने से पूर्व सभी शिक्षण संस्थानों में साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, कक्षाओं की तैयारी एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई थीं। शिक्षकों ने बच्चों को नए सत्र के लक्ष्यों से अवगत कराते हुए निपुण भारत मिशन के तहत बेहतर शैक्षिक उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रेरित किया।
गर्मी का प्रभाव
उधर, विद्यालय खुलने के पहले ही दिन भीषण गर्मी और उमस ने छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों की परेशानी बढ़ा दी। दोपहर के समय तापमान और गर्म हवाओं के कारण कक्षाओं में पढ़ाई प्रभावित होती दिखाई दी। इसे देखते हुए विभिन्न शिक्षक संगठनों ने शासन से ग्रीष्मावकाश कुछ दिन और बढ़ाने की मांग की है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष विवेक शुक्ला ने कहा कि मौसम सामान्य होने तक विद्यालयों का संचालन बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है。
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