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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: NBCC की देखरेख में आम्रपाली की 16 संपत्तियां होंगी नीलाम

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आम्रपाली समूह की 16 संपत्तियां नीलामी के लिए चिन्हित की। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि एनबीसीसी की देखरेख में आम्रपाली समूह की 16 संपत्तियों को नीलामी किया जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जरूरत पड़ने पर इसके लिए पेशेवर फर्मों की मदद भी ली जा सकती है। इस मौके पर एनबीसीसी की वकील ने कहा कि वह 1000 करोड़ के धन से आम्रपाली समूह 15 परियोजनाओं पर आगे काम शुरू कर सकता है। वहीं शेष 7500 करोड़ की राशि उसे तिमाही किस्तों में दी जा सकती है। 

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने समूह के सीएमडी अनिल शर्मा द्वारा 67 करोड़ की परिसंपत्ति दिखाने पर भी सवाल उठाए, जबकि 2014 में बिहार के जहानाबाद क्षेत्र से जदयू उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ते समय शर्मा ने अपनी संपत्ति 847 करोड़ बताई थी। शीर्ष अदालत ने अनिल शर्मा से सभी संपत्तियों के नक्शे भी मांगे हैं। अदालत ने शर्मा के परिवार के दूसरे सदस्यों और कंपनी के अन्य निदेशकों की निजी संपत्तियों का भी ब्योरा चार दिन के अंदर मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी। 

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इसके साथ ही बेंच ने आम्रपाली समूह की 46 कंपनियों के फोरेंसिक ऑडिट कराए जाने का आदेश दिया है। ये ऑडिट दो माह के अंदर कराकर रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जानी है।

इन संपत्तियों की नीलामी होगी 
जिन 16 संपत्तियों की नीलामी की जानी है उसमें आम्रपाली होम्स वृंदावन, आम्रपाली होम्स प्रोजेक्ट प्रा लि. इंदौर, आम्रपाली होम्स भुवनेश्वर, संगम कालोनाइजर, जयपुर, हाईटेक सिटी जयपुर, अल्ट्रा होम्स, सिक्किम, उदयपुर, रायपुर और नया रायपुर शामिल है। इसके अलावा आम्रपाली लीजर वैली, आम्रपाली लीजर वैली कामर्सियल, ग्रेटर नोएडा, आम्रपाली सेंट्यूरियल पार्क और सेंट्यूरियल पार्क कामर्सियल शामिल है। 

नीलामी की एनबीसीसी की देखरेख में होगी। इसके लिए एनबीसीसी का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यह सरकारी और भरोसेमंद कंपनी है। शीर्ष न्यायालय ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा ऑथरिटी से आम्रपाली के वकील गौरव भाटिया ने कोर्ट में कहा कि घर खरीदारों को लेकर उनकी कंपनी का विचार बिल्कुल साफ है और कंपनी चाहती है कि खरीदारों के सपने पूरे किए जाएं। इस पर शीर्ष न्यायालय ने कहा, हर आदमी अपनी उंगलियां जला चुका है। अब किसी का भी भरोसा आपके ऊपर नहीं रह गया है। जब तक कि आप इन परियोजनों को पूरा करने के लिए धन का इंतजाम नहीं करते हैं। 

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चार साल में संपत्ति 847 करोड़ से 67 करोड़ कैसे हुई 
सुप्रीम कोर्ट ने अदालत में मौजूद आम्रपाली समूह के सीएमडी अनिल शर्मा से भी सवाल किया कि कैसे आपकी संपत्ति महज चार सालों में 847 करोड़ से 67 करोड़ रुपये रह गई। इस पर शर्मा ने जवाब दिया कि 847 करोड़ में से 700 करोड़ की साझेदारी उनकी समूह की कंपनियों में थी। तब कोर्ट ने पूछा कि उनके पास ये इक्विटी खरीदने के लिए 700 करोड़ रुपये कहां से आए। यह आपका निजी धन नहीं था, जो आपने चुनावी शपथ पत्र में दिखाया था। आप 700 करोड़ रुपये की इक्विटी तभी दिखा सकते हैं जब आपको ये धन किसी से मिला हो। यह कंपनी कानून के हिसाब से बिल्कुल गलत है। 

अनिल शर्मा को कड़ी चेतावनी दी
शीर्ष अदालत ने शर्मा को कहा कि वह अपने लिए ज्यादा मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। फिलहाल अदालत आपकी संपत्तियों की जांच नहीं करा रही है लेकिन भविष्य में ऐसा जरूर किया जाएगा।

आप किसी को भी धोखा दे सकते हैं
बेंच ने अनिल शर्मा से कहा कि आप इस धरती पर किसी को भी धोखा दे सकते हैं। एक कारोबारी अपनी साख को लेकर चिंतित रहता है पर आपने ऐसा नहीं किया। आप तो आदतन अपराधी प्रतीत होते हैं। 

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