DA Image
5 जुलाई, 2020|1:22|IST

अगली स्टोरी

रंगअंधता के शिकार छात्र बनेंगे डॉक्टर, MBBS में दाखिला देने का आदेश

supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में रंग अंधता के पीड़ित दो छात्रों को एमबीबीएस कोर्स में दाखिला देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि वे डॉक्टर बन सकते हैं और उनकी यह विकलांगता चिकित्सा कार्य में आड़े नहीं आएगी। 

जस्टिस अमिताव राय और ए.एम. खानविलकर की पीठ ने यह आदेश देते हुए त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिया कि दोनों छात्रों को 2018-19 में सीटें आवंटित करे। इससे कॉलेज की दो सीटों का कोटा कम हो गया है। 

कोर्ट ने एमसीआई की यह दलील भी ठुकरा दी कि छात्रों ने नीट परीक्षा पास नहीं की है, जबकि यह बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पिछले वर्ष से मेडिकल कोर्स में नीट परीक्षा लागू हुई है। इन छात्रों ने 2015 में त्रिपुरा राज्य मेडिकल परीक्षा पास की थी, जिसमें उन्होंने112 और 140 अंक प्राप्त किए थे। 

पीठ ने कहा कि हम संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त असीमित शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश दे रहे हैं। क्योंकि इस मामले में न्याय की अतीन्द्रिय महत्ता नजर आ रही है जो इस केस में स्पष्ट रूप से सामने है। संविधान और कानून कहता है कि सबको शामिल करना चाहिए। 

आदेश देने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने एमसीआई को निर्देश दिया था कि वह विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन करे जो यह बताएगी कि क्या रंगअंधता से डॉक्टरी पेशे में कोई समस्या आ सकती है। कमेटी ने रिपोर्ट में कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि रंग अंधता से पीड़ित डॉक्टर रोग निदान और सर्जरी नहीं कर सकते। उन्हें उच्च शिक्षा या विशेषज्ञता प्राप्त करने में दिक्कत आ सकती है, लेकिन सामान्य निदान में नहीं। 


इन छात्रों को एमसीआई ने काउंसलिंग के दौरान यह कहकर दाखिले से मना कर दिया था कि वे रंग अंधता के शिकार हैं। छात्रों ने इस आदेश को त्रिपुरा हाईकार्ट में चुनौती दी लेकिन हाईकार्ट ने याचिका खारिज कर दी।
 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:SC directs admission of two colour-blind students in MBBS