सऊदी अरब ने समुद्री सुरक्षा गठबंधन बनाने की घोषणा की
सऊदी अरब और 13 अन्य देशों ने बाब अल-मंदेब, लाल सागर और अदन की खाड़ी जैसे समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक गठबंधन बनाने पर सहमति जताई है। यह कदम ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के समुद्री नाकेबंदी और समुद्री व्यवधानों के बीच उठाया गया है। सऊदी अरब गठबंधन का संस्थापक देश होगा।

- मकसद बाब अल-मंदेब, लाल सागर और अदन की खाड़ी जैसे समुद्री मार्गों की सुरक्षा रियाद, एजेंसी। सऊदी अरब और 13 अन्य देशों ने समुद्री मार्गों से गुजरने वाले वाणिज्यिक पोतों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक गठबंधन बनाने पर सहमति जताई है। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि गठबंधन का उद्देश्य बाब अल-मंदेब, लाल सागर और अदन की खाड़ी जैसे अहम समुद्री मार्गों की सुरक्षा करना है।
गठबंधन के कारण
यह कदम ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी और लगातार जारी समुद्री व्यवधानों के बीच उठाया गया है। इसके अलावा, होर्मुज बंद होने से पैदा हुई आवाजाही की बाधाओं ने भी वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इन घटनाक्रमों के कारण कच्चे तेल की कीमतें करीब 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। सऊदी अरब गठबंधन का संस्थापक देश होगा और उसके क्षेत्र में इसका केंद्रीय मुख्यालय स्थापित किया जाएगा। प्रस्तावित ढांचे में संयुक्त कमान व्यवस्था, संचालन नियंत्रण केंद्र और गठबंधन के प्रयासों में समन्वय के लिए एक महासचिवालय शामिल होगा।
गठबंधन में ये देश
सऊदी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, गठबंधन के संस्थापक सदस्य देशों में सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, यमन, बांग्लादेश, नाइजीरिया, सूडान, जिबूती और सोमालिया शामिल हैं।
रियाद में हुआ समझौता
गठबंधन को लेकर औपचारिक समझौता रियाद में आयोजित सैन्य सम्मेलन के दौरान हुआ। सम्मेलन में 43 देशों के रक्षा प्रमुखों और प्रतिनिधियों के साथ यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। मंत्रालय के अनुसार बैठक में गठबंधन के प्रस्तावित मूल चार्टर पर चर्चा की गई। यह बैठक आमने-सामने और वीडियो कॉन्फ्रेंस, दोनों माध्यमों से हुई।
किसी देश को निशाना बनाने के लिए नहीं
सऊदी रक्षा अधिकारियों ने गठबंधन को पूरी तरह रक्षात्मक पहल बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन किसी विशेष देश या संगठन को निशाना बनाने के लिए नहीं बनाया गया है। गठबंधन के सभी कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप होंगे और सदस्य देशों की संप्रभुता का सम्मान किया जाएगा।


