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देशसरमा तो CM बन गए लेकिन सोनोवाल का क्या? असम में ही मिलेगी जिम्मेदारी या दिल्ली आएंगे

रामनारायण श्रीवास्तव, हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Published By: Himanshu Jha
Wed, 12 May 2021 05:53 AM
सरमा तो CM बन गए लेकिन सोनोवाल का क्या? असम में ही मिलेगी जिम्मेदारी या दिल्ली आएंगे

असम में दोबारा मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में पिछड़ गए भाजपा के वरिष्ठ नेता सर्बानंद सोनोवाल को संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। असम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास के मंत्री बन जाने के बाद इस पद पर नई नियुक्ति की जानी है। ऐसे में सोनोवाल को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा केंद्र सरकार या केंद्रीय संगठन में भी शामिल किए जाने की संभावना है।

भाजपा नेतृत्व ने असम की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सर्बानंद सोनोवाल को फिर से मुख्यमंत्री बनाने की बजाय उनकी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे हेमंत बिस्वा सरमा को नया मुख्यमंत्री बनाया है। इस बदलाव के लिए पार्टी नेतृत्व ने सोनोवाल को मना लिया था, लेकिन उनको क्या जिम्मेदारी दी जाएगी यह बड़ा सवाल है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सोनोवाल हमारे वरिष्ठ नेता हैं और उनको राज्य में या केंद्र में अहम जिम्मेदारी दी जाएगी।

दरअसल, असम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रंजीत कुमार दास अब राज्य सरकार में मंत्री बन गए हैं। एक व्यक्ति, एक पद के चलते उनका प्रदेश अध्यक्ष पद से हटना तय है। ऐसे में सरकार और संगठन में बेहतर संबंध के लिए भाजपा सोनोवाल को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है।

सोनोवाल आदिवासी समुदाय से आते हैं और सामाजिक समीकरणों के हिसाब से यह भाजपा के लिए मुफीद रहेगा। हालांकि, एक मत यह भी है कि राज्य में दोनों नेताओं को रखने से टकराव बढ़ सकता है। ऐसे में सोनोवाल को केंद्र सरकार में मंत्री या केंद्रीय संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। चूंकि सोनोवाल विधायक चुने गए इसलिए पार्टी केंद्र में मंत्री बनाकर उपचुनाव के लिए शायद ही तैयार हो। ऐसे में संगठन में जिम्मेदारी मिलने की ज्यादा संभावना है।

अभी यह भी तय नहीं है कि नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेड़ा) के संयोजक की जिम्मेदारी संभाल रहे हेमंत बिस्वा सरमा अब मुख्यमंत्री बनने के बाद भी इस जिम्मेदारी को आगे संभालेंगे या बदलाव किया जाएगा। अगर बदलाव किया जाता है तो सोनोवाल के लिए भी इस नाम पर विचार किया जा सकता है। पांच साल तक मुख्यमंत्री रहते हुए सोनोवाल की पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के नेतृत्व के साथ बेहतर समझ बनी है। हालांकि, रणनीतिक दृष्टि से अभी भी हेमंत बिस्वा सरमा इसके लिए सबसे उपयुक्त माने जा रहे हैं।

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