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CSIR-NAL के एयरक्राफ्ट ने भरी पहली सफल उड़ान

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देश में निर्मित स्वदेशी वायुयान सारस के संशोधित संस्करण की बुधवार को पहली उड़ान सफल रही। सारस ने सुबह 11 बजे नेशनल एयरोस्पेस लेब्रोटरी (एनएएल) के हवाई अड्डे से 40 मिनट की उड़ान भरी।

वैज्ञानिक एवं औद्यौगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने कहा कि सारस के नए संस्करण की पहली उड़ान सफल रही है। सारस को पहले 20 सफल उड़ानें भरनी होंगी। उसके बाद ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इसे नागरिक विमान सेवाओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। सीएसआईआर की बेंगलोर स्थित प्रयोगशाला एनएएल ने इसका निर्माण किया है।
सीएसआईआर के अनुसार पुराने सारस में कई बदलाव किए गए हैं। वजन कम किया गया है। लेकिन सीट संख्या अभी 14 ही रखी गई है। लेकिन जो संस्करण बाजार में लाया जाएगा, उसमें सारस को 19 सीटर बनाने की योजना है।

एनएएल के सारस के दो प्रोटोटाइप तैयार किए थे। सारस ने पहली उड़ा 29 मई 2004 को भरी थी। इसके बाद दोनों प्रोटोटाइप के परीक्षण चल रहे थे। लेकिन 2009 में एक सारस में उड़ान के दौरान आग लग गई। जिसके बाद सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर काम बंद कर दिया। लेकिन 2017 में इसे फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया था। जिसके बाद सारस के पहले प्रोटोटाइप पीटी 1 में कुछ बदलाव कर इसे पीटी 1एन बनाया गया है।

सीएसआई के अनुसार सारस की उड़ान का नेतृत्व विंग कमांडर यूपी सिंह, ग्रुप कैप्टन आर. वी. पानीकेर एवं ग्रुप कैप्टन के. पी. भट्ट ने किया। तीनों भारतीय वायुसेना के पायलट अधिकारी हैं। विमान ने 8500 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरी। उन्होंने दावा किया है कि विमान के सभी संचालन पैरामीटर सामान्य हैं।

सारस के अगर बाकी परीक्षण भी सफल रहते हैं तो यह विमान छोटे शहरों के बीच उड़ान सेवाएं शुरू करने के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। छोटे शहरों को वायुसेवा से जोड़ने के लिए सरकार ने योजना भी शुरू कर रखी है। वायुसेना भी शुरू से ही इसमें दिलचस्पी दिखा रही है। सीएसआईआर के अनुसार विश्व बाजार में भी छोटे विमानों की बिक्री की अपार संभावनाएं हैं।

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  • Web Title:SARAS PT1N has successfully made its maiden flight