‘ज्ञान परंपरा का मूल जानने के लिए संस्कृत ज्ञान जरूरी’
बीएचयू के कला संकाय के संस्कृत विभाग में संस्कृत दिवस पर दो दिवसीय समारोह में 100 से ज्यादा छात्रों ने प्रतिभा दिखाई। उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. प्रशस्यमित्र शास्त्री ने संस्कृत की विविधता का परिचय दिया। विभागाध्यक्ष प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी ने संस्कृत की महत्ता पर जोर दिया।

वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। बीएचयू के कला संकाय स्थित संस्कृत विभाग में संस्कृत दिवस पर दो दिवसीय समारोह आयोजित किया गया। विभिन्न संकायों से 100 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने संस्कृत भाषण, संस्कृत सामान्य ज्ञान, सस्वर स्तोत्र पाठ और श्लोकान्ताक्षरी प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा की झलक दिखाई।
समारोह की शुरुआत
उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. प्रशस्यमित्र शास्त्री ने सरस संस्कृत कविता हास्य-व्यंग्य से विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा की विविधता से अवगत कराया। अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान-परम्परा संस्कृत भाषा में निबद्ध है। वेद, पुराण, स्मृति, अर्थशास्त्र, आयुर्वेद आदि अनेक महत्वपूर्ण ग्रन्थ संस्कृत भाषा में रचे गए हैं। भारतीय ज्ञान-परम्परा के मूल स्वरूप, उसके अध्ययन और उसमें निहित वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक ज्ञान को समझने के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान आवश्यक है।
प्रतियोगिताओं के निर्णायक
कार्यक्रम संयोजक प्रो. शरदिन्दु कुमार तिवारी ने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन ज्ञान की भाषा ही नहीं, बल्कि आज भी विभिन्न क्षेत्रों में निरन्तर प्रयुक्त एवं प्रासंगिक भाषा है। विभिन्न प्रतियोगिताओं के निर्णायक के रूप में प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी, प्रो. पतंजलि मिश्र, प्रो. विनय पाण्डेय, प्रो. भगवत्शरण शुक्ल, प्रो. चन्द्रकान्ता राय, प्रो. शिवराम शर्मा, प्रो. जया मिश्रा, डॉ. मंजु कुमारी, प्रो. पुष्पा त्रिपाठी, डॉ. अभिजित् दीक्षित, डॉ. बृहस्पति भट्टाचार्य और डॉ. दीपक शर्मा मौजूद रहे। सत्रों का संयोजन डॉ. शिल्पा सिंह, डॉ. राजेश सरकार, डॉ. सूर्यप्रकाश सिंह, डॉ. पवन कुमार पाण्डेय, डॉ. सिद्धिदात्री भारद्वाज, डॉ फिरोज, डॉ. दिव्या भारती, डॉ. प्रदीप कुमार, प्रो. अभिमन्यु, डॉ. शिवलोचन शांडिल्य के साथ शोधछात्रों ने किया।


