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सब्जी में नमक और मोबाइल पर बात करने का झगड़ा, जानें कैसे मामले पहुंच रहे थाने

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सब्जी में नमक ज्यादा या कम। रसोई में रखी दालों के नामों को लेकर और मोबाइल पर बात और चैट करने को लेकर शहर से देहात तक मियां और बीवी में झगड़े हो रहे हैं। यह तो मात्र दो उदाहरण हैं। छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी में हो रहे झगड़े दहेज उत्पीड़न का रूप ले रहे हैं। महिला थाना ऐसे मामलों को निपटाने में लगा है। आंकड़ों की मानें, तो 100 में से 80 मामले यही छोटे-छोटे झगड़े होते हैं। मात्र 20 फीसदी मामले ही असल मायने में दहेज उत्पीड़न के होते हैं, जिनमें मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाती है।

सब्जी में नमक और मोबाइल पर बात करने को लेकर झगड़ रहे मियां-बीवी
केस:-1
कुछ माह पहले महिला थाने में एक नव विवाहिता पहुंची। वह जगदीशपुरा थाना क्षेत्र की रहने वाली थी। उसने शिकायत की कि मेरे साथ ससुराल वाले मारपीट करते हैं। महिला थाना पुलिस ने उसके पति और ससुराल वालों को बुलाया। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद जांच की,तो पता चला कि मामला खाने में नमक ज्यादा होने का था। ससुराल वालों ने खाने में नमक को लेकर बहू से कुछ कहा। इसी बात को लेकर झगड़ा हो गया और मामला महिला थाने तक पहुंच गया। काउंसलिंग के बाद दोनों पक्षों में समझौता कराया गया।

केस:-2
थाना सदर क्षेत्र की रहने वाली महिला अपने तीन छोटे बच्चों के साथ तपती धूप में महिला थाने पहुंची। उसने शिकायत की कि पति उसके साथ मारपीट करता है। उस पर शक करता है। वह मायके गई थी, तो फोन पर गाली गलौज की। महिला थाना पुलिस ने उसके पति को बुलाया, तो पूरा मामला खुल गया। पति ने बताया कि घर में दाल को लेकर झगड़ा हुआ था। दोनों की लव मैरिज हुई थी। पति ने बताया कि पत्नी मायके गई थी। 25 दिन हो गए। जब घर आने की कहा तो घर न आकर महिला थाने पहुंच गई। पुलिस ने दोनों को समझाकर घर भेजा।

केस:-3
थाना शाहगंज की रहने वाली एक नव विवाहिता ने महिला थाने में शिकायत की कि उसके ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट की है। अतिरिक्त दहेज की मांग कर रहे हैं। महिला थानाध्यक्ष ने महिला के पति को बुलाया। जांच कराई। पता चला कि महिला का अपनी देवरानी और जेठानी से पानी भरने को लेकर झगड़ा हुआ था। इसके बाद महिला अपने मायके वालों की शह पर महिला थाने पहुंच गई थी। थानाध्यक्ष ने दोनों पक्षों की काउंसलिंग की। इसके बाद दोनों पक्ष में समझौता कराकर उनके घर भेजा गया।

महिला थानाध्याक्ष रीना चौधरी ने बताया कि थाने में आने वाले ज्यादातर मामले छोटे-मोटे झगड़े के होते हैं। इन्हें दहेज उत्पीड़न का रूप देने की कोशिश की जाती है। इसमें सबसे ज्यादा मामले सब्जी में नमक, खाना बनाने में देरी, घर का काम छोड़ कर बाजार घूमने, बच्चों का ख्याल न रखने या फिर फोन पर लगे रहने के होते हैं। थाने में आने के बाद महिला और उसके पक्ष का व्यवहार सिर्फ यही होता है कि उनकी बेटी के साथ जुल्म हो रहा है। कैसे भी उनकी बेटी को बाहर निकालो। जैसे-जैसे मामलों की तह तक पहुंचते हैं, तो पता चलता है कि मामूली विवाद था। 

रीना चौधरी बताती हैं कि झगड़ा थाने तक बिल्कुल नहीं आए यदि पति और पत्नी के झगड़े में कोई तीसरा हस्तक्षेप न करे। कहासुनी होने पर लड़की के मायके पक्ष या फिर किसी तीसरे पक्ष की ओर से मामले को भड़का दिया जाता है। लेकिन थाने में सीओ, थानाध्यक्ष और अन्य थाना कर्मचारियों की ओर से दोनों पक्षों को बैठाकर उनकी काउंसलिंग की जाती है। लिखित समझौते के बाद उन्हें घर भेजा जाता है। उनका कहना है कि सिर्फ 20 फीसदी मामले ही असल में दहेज उत्पीड़न के होते हैं।

किन-किन बातों पर होते हैं झगड़े
- समय पर खाना न बनाने को लेकर
- बाजारों में शॉपिंग करने को लेकर
- पति का ससुराल वालों का पक्ष लेने पर
- सब्जी में नमक कम या ज्यादा होने पर 
- बच्चों पर ध्यान न देने को लेकर
- पत्नी के मायके में ज्यादा दिन रुकने पर
- घर का काम न करने और फोन पर लगे रहना
- पत्नी का रोज बाहर खाने की जिद करना

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