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हिंदी न्यूज़ देशगवाह बने सचिन वझे को सीबीआई कोर्ट से झटका, जमानत देने से इनकार

गवाह बने सचिन वझे को सीबीआई कोर्ट से झटका, जमानत देने से इनकार

अनिल देशमुख पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों वाले केस में आरोपी से गवाह बने सचिन वझे को सीबीआई कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया है। कानून का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि गवाह कस्टडी में है।

गवाह बने सचिन वझे को सीबीआई कोर्ट से झटका, जमानत देने से इनकार
Ankit Ojhaचारुल शाह, हिंदुस्तान टाइम्स,मुंबईThu, 23 Jun 2022 03:17 PM

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महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख पर दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में गवाह बने आरोपी सचिन वझे को सीबीआई कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि जब तक सुनवाई खत्म न हो जाए आरोपी से गवाह बने शख्स को भी हिरासत में रखा जाना चाहिए। स्पेशल जज एसएच ग्वालानी ने वझे की याचिका खारिज करते हुए कहा, 'जो शख्स गवाह बन गया है और जिसे माफ भी कर दिया गया है उसपर भी कुछ शर्तें लागू होती हैं।  सीपीसी की धारा 306 (4 ) बी के मुताबिक अगर शख्स पहले से जमानत पर बाहर नहीं है तो उसे सुनवाई खत्म होने तक हिरासत में ही रहना होगा।'

बता दें कि देशमुख को पहले ईडी ने 2 नवंबर को गिरफ्तार किया था। उनपर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप  हैं। ईडी ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। वहीं 21 अप्रैल 2021 को सीबीआई ने भी देशमुख और अन्य के खिलाफ मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के आरोपों के बाद भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि देशमुख ने सचिन वझे समेत अन्य पुलिस अधिकारियों से हर महीने 100 करोड़ की वसूली करने को कहा था। यह वसूली रेस्तरां और बार से की जानी थी।

वझे ने दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच 4.70 करोड़ रुपये इकट्ठे किए थे और इस वसूली को किस्तों में देशमुख को ट्रांसफर किया था। वझे ने ये पैसे सीधे नहीं बल्कि देशमुख के पीए कुंदन शिंदे के अकाउंट में भेजे थे। इस केस में सीबीआई ने वझे को 4 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में वझे ने गवाह बनना स्वीकार किया और फिर उसे स्पेशल कोर्ट ने माफ कर दिया था।

सचिन वझे ने यह कहते हुए जमानत याचिका दाखिल की थी कि उसे माफ कर दिया गया है। उसके वकील रौनक नाइक ने तर्क रखा था कि अब आरोपी एक सरकारी गवाब बन गया है। सीबीआई ने इस याचिका का विरोध किया था। सीबीआई कोर्ट ने एजेंसी के विरोध को स्वीकार किया और कहा कि समय-समय पर गवाह का भी हाजिर होना जरूरी है। जब तक सुनवाई चलेगी उसे जमानत पर नहीं छोड़ा जा सकता।

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