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हिंदी न्यूज़ देशRajasthan Crisis: फिर वही नेता, वैसी ही तस्वीर; लेकिन क्या इस बार सचिन पायलट-अशोक गहलोत विवाद का होगा फाइनल एंड?

Rajasthan Crisis: फिर वही नेता, वैसी ही तस्वीर; लेकिन क्या इस बार सचिन पायलट-अशोक गहलोत विवाद का होगा फाइनल एंड?

Rajasthan Crisis: अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सामने आई तस्वीरों को राजनीतिक एक्सपर्ट्स अलग तरह से देख रहे हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस बार दोनों के बीच के विवाद का फाइनल एंड हो सकता है।

Rajasthan Crisis: फिर वही नेता, वैसी ही तस्वीर; लेकिन क्या इस बार सचिन पायलट-अशोक गहलोत विवाद का होगा फाइनल एंड?
Madan Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 30 Nov 2022 03:49 PM
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Sachin Pilot vs Ashok Gehlot: राजस्थान में जब से कांग्रेस की वर्तमान सरकार बनी है, तभी से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच विवाद जारी है। पायलट राज्य में नेतृत्व परिवर्तन चाहते हैं, जबकि गहलोत ने इसे रोकने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष जैसा पद ठुकरा दिया। गहलोत और पायलट के बीच एक बार फिर से सुलह करवाने की कोशिश की गई। ठीक वैसे ही तस्वीरें भी सामने आईं, जैसी कि मुख्यमंत्री के सेलेक्शन के ठीक वक्त साल 2018 में आई थी। दरअसल, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल बीते दिन राजस्थान पहुंचे तो थे 'भारत जोड़ो यात्रा' को लेकर, लेकिन असल वजह गहलोत और सचिन पायलट ही थे। गहलोत के पायलट को गद्दार कहने के बाद विवाद काफी बढ़ गया था और माना जा रहा था कि अब राजस्थान के मुख्यमंत्री आर-पार के मूड में आ गए हैं। वे किसी भी कीमत पर सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहते। इसी सिलसिले में जब वेणुगोपाल ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट से मुलाकात की तो दोनों को मीडिया के सामने भी लाया गया। पत्रकारों के सामने तस्वीरें सामने आईं, जिसमें अशोक गहलोत, केसी वेणुगोपाल, गोविंद सिंह डोटासरा और सचिन पायलट एक-दूसरे का हाथ थामे एकता और पार्टी में सबकुछ ठीक होने का संदेश देते नजर आए।

हाथ तो मिले, लेकिन क्या दिल भी मिलेंगे?
पायलट और गहलोत के बीच में 36 का आंकड़ा है। यह दूरी तब और बढ़ गई थी, जब साल 2020 के मध्य में सचिन पायलट बगावत करते हुए अपने समर्थक मंत्रियों और विधायकों के साथ दिल्ली के पास स्थित एक रिजॉर्ट में चले गए थे। इसके बाद से ही गहलोत सचिन पर बीजेपी की मदद करने का आरोप लगाते रहे हैं। फिर हाल ही में जब राजस्थान में सत्ता परिवर्तन की बात चलने लगी तो गहलोत के करीबी विधायकों ने 25 सितंबर को बगावत कर दी, जिसके बाद मुख्यमंत्री को सोनिया गांधी से माफी तक मांगनी पड़ी। वहीं, एक निजी चैनल से बात करते हुए पायलट को गद्दार कहने से राजस्थान की राजनीति में भूचाल आ गया। अब जब विवादों को थामने के लिए कांग्रेस आलाकमान का मैसेज लेकर केसी वेणुगोपाल राजस्थान पहुंचे, तो सबकुछ फिर से ठीक होता नजर आया। लेकिन तस्वीरें सामने आने के बाद सवाल उठने लगे कि क्या हाथ तो मिले, लेकिन दिल भी मिलेंगे? क्या अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की दूरियां कम होंगी या फिर ये तस्वीरें सिर्फ मीडिया और बीजेपी के लिए दिखावा भर है और अंदर-ही-अंदर गहलोत सही समय का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बंद कमरे में हुई बैठक में केसी वेणुगोपाल ने साफ कर दिया कि अब कोई भी बयानबाजी करेगा, तो उसके खिलाफ वाकई में सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिर वह किसी भी स्तर का नेता हो। वेणुगोपाल या फिर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से यह कोई पहली बार चेतावनी नहीं जारी की गई है, लेकिन हर बार दोनों गुटों के नेता इसे नजरअंदाज करने से नहीं चूकते।

पहले भी सामने आई थीं पायलट-गहलोत की ऐसी ही तस्वीरें, लेकिन क्या हुआ...?
साल 2018 में राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे भले ही कांग्रेस के पक्ष में गए, लेकिन तभी से एक नए विवाद ने जोर पकड़ लिया। यह विवाद था मुख्यमंत्री पद की कुर्सी। दरअसल, राज्य में कांग्रेस को वापसी करवाने का जिसे सबसे ज्यादा श्रेय गया, वह तत्कालीन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट थे। ऐसे में उन्होंने मुख्यमंत्री पद की कुर्सी पर अपना पहला हक जमाया, लेकिन बाजी अशोक गहलोत ने मार ली। दोनों के बीच के विवाद का हल निकालने के लिए खुद राहुल गांधी ने दोनों नेताओं से बातचीत की और एक तस्वीर पोस्ट की। 14 दिसंबर, 2018 को ट्विटर पर पोस्ट की गई इस तस्वीर में राहुल गांधी के एक तरफ मुस्कुराते हुए अशोक गहलोत दिखाई दिए, तो दूसरी ओर सचिन पायलट। राहुल ने इस तस्वीर को कैप्शन दिया, ''द यूनाइटेड कलर ऑफ राजस्थान।'' इसके बाद गहलोत को सीएम और पायलट को डिप्टी सीएम की कमान सौंपी गई। वहीं, साल 2020 में हुई बगावत के बाद भी सचिन पायलट और अशोक गहलोत को साथ दिखाने की कोशिश फिर से हुई, लेकिन दोनों के मन में खटास खत्म नहीं हुई। अशोक गहलोत कई मंचों से सचिन पायलट के विरोध में बयान देते रहते। वहीं, पायलट गुट के विधायक उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग करने से भी नहीं रुकते।

इस बार गहलोत-पायलट विवाद का फाइनल एंड कैसे संभव?
अशोक गहलोत और सचिन पायलट की आई तस्वीरों को राजनीतिक एक्सपर्ट्स अलग तरह से देख रहे हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस बार दोनों के बीच के विवाद का फाइनल एंड हो सकता है। इसके पीछे वजह कांग्रेस आलाकमान और गांधी परिवार के पूरी तरह से मन बना लेना है। दरअसल, 25 सितंबर को करीबी विधायकों के बगावत के बाद सोनिया गांधी अशोक गहलोत से काफी नाराज बताई जा रही थीं। वहीं, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी गहलोत के बजाए सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में लंबे समय से रहे हैं। ऐसे में अब जब अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और राजस्थान में आलाकमान ने सत्ता परिवर्तन का पूरा मन बना लिया है तो 'भारत जोड़ो यात्रा' व गुजरात चुनाव के नतीजों के बाद इस पर फैसला किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस बार कांग्रेस आलाकमान किसी भी कीमत पर गहलोत के सामने 'हार' मानने को तैयार नहीं है और पूरी तरह से विवाद का फाइनल एंड करने का मन बना चुका है।