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23 अक्तूबर, 2020|12:27|IST

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RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले, राष्ट्रवाद शब्द का आज दुनिया में अच्छा अर्थ नहीं

mohan bhagwat

आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) प्रमुख मोहन भागवत ने झारखंड के रांची में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि राष्ट्रवाद की जगह राष्ट्र या राष्ट्रीय जैसे शब्दों का इस्तेमाल होना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि राष्ट्रवाद का मतलब नाजी या हिटलर और फांसीवाद भी निकाला जा सकता है। भगवत ने कहा कि दुनिया के एक बड़े भू भाग में विद्वान लोग सोचते है कि राष्ट्र का बड़ा होना दुनिया में खतरनाक बात है। नेशनलिज्म (राष्ट्रवाद) शब्द का आज दुनिया में अच्छा अर्थ नहीं है। 

मोहन भागवत ने ब्रिटेन में एक आरएसएस कार्यकर्ता के साथ अपनी बातचीत को याद करते हुए कहा कि वहां 40 से 50 लोगों से संघ के बारे में बातचीत हुई। संघ के कार्यकर्ता ने मुझे कहा कि अंग्रेजी आपकी भाषा नहीं है और इसलिए शब्दों का इस्तेमाल बचकर कीजिएगा। यहां पर नेशनलिज्म शब्द की जगह नेशनल कहेंगे तो चलेगा, नेशन कहेंगे तो चलेगा, नेशनलिटी कहेंगे तो चलेगा पर नेशनलिज्म मत कहिएगा। नेशनलिज्म का मतलब हिटलर और नाजीवाद होता है। 

इस कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख ने कहा कि दुनिया के सामने इस वक्त आईएसआईएस, कट्टरपंथ और जलवायु परिवर्तन जैसे कई मुद्दे बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने कहा कि विकसित देश क्या करते हैं, वो अपने व्यापार को हर देश में फैलाना चाहते हैं। इसके जरिए वो अपनी शर्तों को मनवाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि कई देश बड़े बने और पतित हो गए। आज भी कई बड़े देश है जिनको कहते हैं महाशक्ति। यह देश महाशक्ति बनकर करते क्या हैं। सारी दुनिया के साधनों को स्वयं के लिए उपयोग करते हैं। सारी दुनिया पर इनकी राजनिति सत्ता चले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर चलती है और चल रही है। 

भारत को एक महान राष्ट्र बनना होगा: भागवत

भागवत ने कहा कि कट्टरता और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं दुनिया भर में शांति को बाधित कर रही हैं और इनका समाधान केवल भारत के पास है क्योंकि उसके पास समग्र रूप से सोचने और इस समस्याओं से निपटने का अनुभव है। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत का इंतजार कर रही है, इसलिए भारत को एक महान राष्ट्र बनना होगा। उन्होंने आरएसएस द्वारा आयोजित 'मेट्रोपोलिटन मीटिंग' में अपने संबोधन में कहा कि जब भी भारत मुख्य भूमिका निभाता है, दुनिया को लाभ होता है।

भागवत ने कहा, ''कट्टरता, पर्यावरण की समस्याएं और खुद को सही एवं शेष सभी को गलत मानने की सोच विश्व में शांति को बाधित कर रही है। उन्होंने कहा कि केवल भारत के पास इन समस्याओं का समाधान तलाशने के लिए समग्र रूप से सोचने का अनुभव है। भागवत ने आरएसएस सदस्यों से हर जाति, भाषा, धर्म एवं क्षेत्र के लोगों से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत का चरित्र 'वसुधैव कुटुम्बकम् के सिद्धांत के साथ एक धागे में सभी लोगों को बांधने का है।

भारत से आने वाले हर व्यक्ति को हिंदू समझा जाता है: संघ प्रमुख

उन्होंने  एक किस्सा याद करते हुए कहा कि एक मुस्लिम बुद्धिजीवी भारत से हज गया था और उसे लॉकेट पहनने के कारण ईशनिंदा के आरोपों में जेल भेज दिया गया था। उन्होंने कहा, 'तब तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने हस्तक्षेप किया और उन्हें आठ दिनों में छुड़वाया। उन्होंने कहा कि भारत से आने वाले हर व्यक्ति को हिंदू समझा जाता है।

भागवत ने कहा, 'भारतीय संस्कृति को हिंदू संस्कृति के तौर पर जाना जाता है जो अपने मूल्यों, आचरण एवं संस्कृति को दर्शाती है।' उन्होंने कहा कि हिंदुत्व विचारक के बी हेडगेवार स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सामाजिक सुधार समेत हर आंदोलन में शामिल हुए थे और उन्होंने आरएसएस का गठन किया ताकि (विदेशी शासन काल के) 1500 से अधिक साल से चल रहीं सामाजिक कुरीतियों को जड़ से उखाड़ फेंका जाए और निस्वार्थ भाव, भेदभाव नहीं करने एवं समानता जैसे स्थायी मूल्य स्थापित किए जाएं।

संघ प्रमुख ने कहा कि भागवत ने कहा कि संघ पर देश को विश्व गुरु बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है और इसके लिए हमें सबको साथ लेकर चलना है। उन्होंने कहा, 'देश को सिर्फ देने की बात करें क्योंकि देश ने भी सब कुछ हमें दिया है। बिना किसी स्वार्थ के हमें देश के लिए काम करना है।'

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  • Web Title:RSS chief Mohan Bhagwat in Ranchi says In the eyes of scholars growing of nation is a dangerous thing in the world