संघ की शताब्दी यात्रा में मातृशक्ति के अनकहे योगदान को मिला मंच
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शतायु संघ और महिला सहभागिता पर परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने महिलाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता का उल्लेख किया। विधानसभा अध्यक्ष ने मातृशक्ति के योगदान की बात की, जबकि पुस्तक की लेखिका ने यह बताया कि ये योगदान राष्ट्र निर्माण के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शतायु संघ और महिला सहभागिता पुस्तक पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, महिला कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव और पुस्तक की लेखिका डॉ. शोभा विजेंद्र ने महिला सहभागिता और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। परिचर्चा की शुरुआत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संघर्षमय बचपन की स्मृतियों से की। उन्होंने बताया कि उनके गांव में विद्यालय नहीं था और उन्होंने लड़कों के स्कूल में इकलौती छात्रा के रूप में शिक्षा प्राप्त की।
अपने अनुभव से वर्तमान समय की तस्वीर जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि आज बेटियां शिक्षा से लेकर स्टार्टअप और आत्मनिर्भरता तक हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने महिलाओं से समाज क्या कहेगा की चिंता छोड़कर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया और महिलाओं के आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के बढ़ते प्रयासों का उल्लेख किया।महिलाओं की इसी बढ़ती सहभागिता को राष्ट्र निर्माण की व्यापक भूमिका से जोड़ते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि संघ की सौ वर्षों की यात्रा में मातृशक्ति का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने कहा कि अनेक महिलाओं ने पारिवारिक दायित्वों के साथ समाजसेवा, शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया है। ऐसे योगदान अक्सर सामने नहीं आते, लेकिन राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। महाना के इसी विचार को पुस्तक की लेखिका डॉ. शोभा विजेंद्र ने पुस्तक के उद्देश्य से जोड़ते हुए बताया कि शतायु संघ और महिला सहभागिता देशभर की उन महिलाओं के संघर्ष, निष्ठा और अनदेखे योगदान का दस्तावेज है, जो चुपचाप राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रही हैं। उन्होंने कहा कि इन अनुभवों को सामने लाना नई पीढ़ी को महिलाओं की भूमिका और उनके समर्पण से परिचित कराने का प्रयास है। इस विचार से सहमति जताते हुए अपर्णा यादव ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति के योगदान को समझना और उसका सम्मान करना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। परिचर्चा इसी संदेश के साथ आगे बढ़ी कि महिलाओं की सहभागिता केवल वर्तमान की उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दीर्घ यात्रा का अभिन्न हिस्सा रही है।


