दून एक्सप्रेस से 120 जीवित दुर्लभ कछुए बरामद, तस्कर फरार

हिन्दुस्तान, धनबाद
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आरपीएफ ने ऑपरेशन वाइलेप के तहत 13010 योग नगरी ऋषिकेश-हावड़ा दून एक्सप्रेस से 120 दुर्लभ इंडियन फ्लैपशेल कछुए बरामद किए। ये कछुए ट्रेन के महिला कोच में लावारिस थैलों में पाए गए। आरपीएफ ने इन्हें कानूनी प्रक्रिया पूरी करके वन विभाग को सौंपने की तैयारी की।

दून एक्सप्रेस से 120 जीवित दुर्लभ कछुए बरामद, तस्कर फरार

आरपीएफ की फ्लाइंग स्क्वायड और टास्क टीम ने ऑपरेशन वाइलेप के तहत 13010 योग नगरी ऋषिकेश-हावड़ा दून एक्सप्रेस से भारी मात्रा में जीवित कछुए बरामद किए हैं। बरामद किए गए सभी 120 कछुए अत्यंत दुर्लभ इंडियन फ्लैपशेल प्रजाति के हैं। आरपीएफ इंस्पेक्टर अजय प्रकाश ने बताया कि सहायक सुरक्षा आयुक्त के निर्देशन में गठित मंडल स्तरीय टास्क टीम शुक्रवार की रात गोमो से धनबाद के बीच ट्रेन में गश्त कर रही थी। इसी दौरान रात करीब 12.30 बजे ट्रेन के महिला कोच में लावारिस हालत में छह बड़े थैले और बोरे मिले। संदेह होने पर जब सुरक्षाकर्मियों ने आसपास के यात्रियों से पूछताछ की तो किसी ने भी उन बोरों पर अपना मालिकाना हक नहीं जताया। इसके बाद धनबाद स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो पर ट्रेन के रुकते ही सभी बोरों को नीचे उतारा गया। बोरों को खोलकर चेक किया गया तो उनके अंदर जूट के छोटे बोरों में छिपाकर रखे गए कुल 120 जीवित कछुए बरामद हुए। हर थैले में करीब 20-20 कछुए ठूसकर रखे गए थे。

कानूनी प्रक्रिया

आरपीएफ ने रात करीब एक बजे कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए जब्त किए गए कछुओं की सूची बनाई। कछुओं को आरपीएफ पोस्ट धनबाद लाया गया, जहां से इन्हें आगे की कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षित पुनर्वास के लिए वन विभाग को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

तस्करी के आरोपी

छापेमारी दल में सब इंस्पेक्टर आभाष चन्द्र सिंह, हेड कांस्टेबल सेतु कुमार सिंह, कांस्टेबल विवेक कुमार, दीपक कुमार, संजीव कुमार और प्रमोद कुमार शामिल थे। कछुओं की तस्करी करने वाले अज्ञात आरोपियों की तलाश की जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरपीएफ ने कितने कछुए बरामद किए थे?
आरपीएफ ने 120 दुर्लभ इंडियन फ्लैपशेल कछुए बरामद किए थे।
Ravikant Jha

लेखक के बारे में

Ravikant Jha

शॉर्ट बायो : रविकांत झा पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता फील्ड में हूं। फिलहाल ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद में चीफ रिपोर्टर की भूमिका में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूं।


परिचय एवं अनुभव
रविकांत झा झारखंड के मीडिया जगत के एक जानेमाने नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 24 वर्षों से अधिक समय का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के लिए क्राइम और रेलवे बिट पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। अखबार के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के लिए भी रविकांत रोचक व पठनीय कंटेंट देते रहते हैं। इनकी झारखंड की पत्रकारिता में गहरी पैठ है।


करियर का सफर
रविकांत झा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण धनबाद से की थी। रविकांत वर्ष 2010 तक दैनिक जागरण धनबाद के साथ रहे। जागरण में वे शिक्षा, लाइफ स्टाइल एंड एंटरटेनमेंट के साथ रेलवे और धर्म-अध्यात्म व समाज जैसों विषयों को कवर करते थे। यह वह दौर था जब कागजों और पैक्स से पत्रकारिता कंप्यूटर और ई-मेल पर शिफ्ट हो रहा था। वर्ष 2010 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद का दामन थामा। वर्ष 2010 में मीडिया जगत में न्यू मीडिया का अंकुरण हो चुका था। हिन्दुस्तान में रहते उन्होंने क्राइम और रेलवे जैसी बिट पर अपनी गहरी पहचान बनाई। न्यू मीडिया के साथ तालमेल बैठाते हुए वे प्रिंट के साथ-साथ ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए भी बेहतर सामग्री दे रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि
B.COM (एकाउंट्स) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। कंप्यूटर में भी डिग्री कोर्स किया है। पत्रकारिता में रहते कई कानूनी कार्यशाला में शामिल हो चुके हैं। पत्रकारिता की अचार संहिता की बारीकी समझ है। हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित मोबाइल जर्नलिज्म (MoJo) की कार्यशाला में भी हिस्सा ले चुके हैं। धनबाद के साथ-साथ झारखंड के अपराध और अपराधियों के क्रोनोलॉजी से वे वाकिफ हैं।


विशेषज्ञता
क्राइम (सामान्य अपराध के साथ-साथ सीबीआई, ईडी, सीआईडी, रेल क्राइम व नक्सल गतिविधि)
रेलवे (रेलवे में ईस्टर्न जोन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि)
पैनल डिस्कशन का पेशेवर तरीके से संचालन

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