विधानसभा में जेपीएससी पर घमासान, छात्र आंदोलन का मुद्दा उठा
हंगामे के बीच 8,399 करोड़ का प्रथम अनुपूरक बजट और एसएलबीसी की वार्षिक रिपोर्ट पेश, विपक्ष का वेल में प्रदर्शन, सीबीआई जांच और परीक्षा रद्द करने की मां

रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा पूरी तरह छाया रहा। छात्र आंदोलन की गूंज सड़क से सदन तक सुनाई दी। विधानसभा परिसर के बाहर भाजपा-आजसू विधायक लगातार दूसरे दिन धरने पर बैठे रहे, जबकि सदन के भीतर प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी भाजपा-एनडीए विधायक वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष ने जेपीएससी और जेएसएससी की विवादित परीक्षाओं को रद्द करने, पूरे मामले की कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच कराने तथा छात्रों के हित में ठोस निर्णय लेने की मांग की। वहीं, सत्ता पक्ष ने सरकार की ओर से की जा रही सीआईडी जांच की कार्रवाई की बात सदन में रखी। एक ओर विपक्ष सीबीआई जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़ा है, तो दूसरी ओर सरकार संवाद, जांच और सदन में चर्चा के जरिए समाधान का दावा कर रही है。
हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही स्थगित
लगातार हंगामे के बीच स्पीकर ने पहले सुबह 11:18 बजे सदन की कार्यवाही दोपहर 12:30 बजे तक स्थगित की। दोपहर में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष फिर वेल में पहुंच गया और नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद सदन की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं और छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग दोहराई। विपक्षी विधायकों ने प्रश्नकाल के दौरान रिपोर्टिंग टेबल थपथपाकर भी विरोध दर्ज कराया। तालियां भी बजाईं।
सीबीआई जांच का क्या हुआ
पहली और दूसरी जेपीएससी परीक्षाओं की सीबीआई जांच का क्या हुआ : सुदिव्य
sत्ता पक्ष की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए पहली और दूसरी जेपीएससी परीक्षाओं की सीबीआई जांच का हवाला दिया और सवाल उठाया कि उन जांचों का क्या परिणाम निकला तथा उस समय नियुक्त हुए लोगों पर विपक्ष क्या कहेगा। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गया।
सरकार निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान चाहती है और इसी उद्देश्य से चार मंत्रियों की समिति गठित की गई है, जो आंदोलनरत छात्रों से सीधे बातचीत करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध है और मुख्यमंत्री ने भी जांच एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता देने की बात कही है। प्रदीप यादव ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सरकार संवाद के माध्यम से समाधान चाहती है।
सदन के बाहर का माहौल
बाबूलाल मरांडी का मुख्यमंत्री और राहुल गांधी पर तंज
सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा में कथित तौर पर गड़बड़ी की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बात करनी चाहिए। अगर मुख्यमंत्री उनकी बात नहीं मानते तो कांग्रेस को इस सरकार का साथ छोड़ देना चाहिए।
दिलचस्प वाकया
14वीं जेपीएससी की जगह 14वीं जेएसएससी लिखे बैनर की चर्चा
हंगामे के बीच एक दिलचस्प वाकया भी सामने आया, जब भाजपा विधायक नीरा यादव सदन के बाहर एक ऐसा बैनर लेकर पहुंचीं, जिस पर 14वीं जेपीएससी की जगह गलती से 14वीं जेएसएससी लिखा हुआ था। जब पत्रकारों ने इस चूक को लेकर सवाल पूछा, तो विधायक नाराज हो गईं और भड़कती नजर आईं। यह बैनर भी सदन के बाहर चर्चा का विषय बना रहा। कुल मिलाकर, सत्र का यह दिन सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर गरमाया रहा।


