चलते-चलते-- इंसानों की तरह महसूस भी कर पाएंगे रोबोट
- रोजमर्रा के कई मुश्किल काम ज्यादा आसानी से कर पाएंगे - अमेरिका-चीन की

कैलिफोर्निया, एजेंसी। आने वाले समय में रोबोट इंसानों की तरह ही महसूस कर पाएंगे। वैज्ञानिक इस तकनीक पर काम कर रहे हैं। रोबोट फिलहाल निर्देश समझ सकते हैं और कई काम खुद कर सकते हैं।
हालांकि, एक बड़ी कमी अभी भी बनी हुई है
हालांकि, एक बड़ी कमी अभी भी बनी हुई है कि वे किसी चीज को छूकर यह ठीक से महसूस नहीं कर पाते कि उसे कितनी ताकत से पकड़ना है, चीज फिसल रही है या नहीं और हाथ को कितना दबाव देना है।
वैज्ञानिकों का मानना है
वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर रोबोट को इंसानों जैसी स्पर्श क्षमता दी जाए तो वे रोजमर्रा के कई मुश्किल काम ज्यादा आसानी से कर पाएंगे। शोध कर रही कई टीमें रोबोट को यह एहसास देने के लिए बड़े पैमाने पर डाटा जुटा रही हैं।
काम करने में रोबोट अभी पीछे
पिछले कुछ वर्षों में विजन-लैंग्वेज-एक्शन मॉडल की वजह से रोबोट काफी बेहतर हुए हैं। यह मॉडल तस्वीरों, वीडियो और इंसानी निर्देशों से सीखकर रोबोट को कपड़े मोड़ने, कमरा व्यवस्थित करने या रसोई के उपकरण इस्तेमाल करने जैसे काम सिखा सकते हैं। लेकिन जब चाबी को ताले में घुमाना, अंडे को बिना तोड़े उठाना या टूथपेस्ट को ब्रश पर लगाना जैसे काम रोबोट को दिए जाते हैं तो वे मुश्किल में पड़ जाते हैं। इंसान यह महसूस कर सकते हैं कि वस्तु कितनी कठोर है और चीज फिसल तो नहीं रही। यही जानकारी रोबोट के पास अभी सीमित है।
स्पर्श सेंसर रोबोट की समझ बढ़ाएंगे
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के प्रोफेसर ट्रेवर डैरेल के मुताबिक, इंसान कई बारीक काम आंखें बंद करके भी कर सकता है। हाथों से मिलने वाला स्पर्श और दबाव का संकेत उसे रास्ता दिखाता है। इसे देखते हुए वैज्ञानिक अब रोबोट में स्पर्श सेंसर लगाने की कोशिश कर रहे हैं। ये सेंसर रोबोट को यह बताने में मदद कर सकते हैं कि उसने किसी वस्तु को कितना दबाया, वस्तु फिसली या नहीं और संपर्क के दौरान क्या बदलाव हुआ।
100 घंटे के डाटा से मिली बड़ी कामयाबी
शोधकर्ताओं की टीम ने पहले से मौजूद एआई डेटा पर मॉडल को प्रशिक्षित किया। फिर उसे स्पर्श की जानकारी देना शुरू किया। इसके लिए उन्होंने करीब 100 घंटे का उच्च गुणवत्ता वाला स्पर्श सेंसर डाटा तैयार किया। इसमें 200 से ज्यादा घरेलू वस्तुओं के साथ पकड़ना, घुमाना, पोंछना और तरल पदार्थ डालना जैसे काम शामिल थे। एआई का एक मॉडल यह तय करता था कि रोबोट को क्या काम करना है, जबकि दूसरा मॉडल तेजी से मिलने वाले टच सिग्नल के आधार पर रोबोट की हरकत को तुरंत बदलता था। इससे काम करने में चार गुना तेजी आई।
रोबोट से बल्ब लगवाए, अंडे उठवाए
रोबोट को बल्ब लगाने, टूथब्रश पर टूथपेस्ट लगाने और अंडे को एक ट्रे से दूसरी ट्रे में रखने जैसे काम कराए गए। 12 अलग-अलग कामों में इसकी औसत सफलता दर 65% रही, जो उस समय के सबसे अच्छे एआई मॉडल से लगभग दोगुनी थी। रोबोट को छूने की समझ देने में सबसे बड़ी समस्या डेटा की कमी है। इंटरनेट पर अरबों तस्वीरें और वीडियो मौजूद हैं, इसलिए AI को देखने की क्षमता सिखाने के लिए बहुत बड़ा डेटा उपलब्ध है। लेकिन रोबोट ने किसी चीज को छूते समय क्या महसूस किया, इसका डेटा बहुत कम है।
3,000 घंटे का डेटा जोड़ने की कोशिश
चीन के त्सिंगहुआ विश्वविद्यालय के शोधकर्ता चेंगबो युआन और उनकी टीम ने अलग-अलग स्रोतों से 3,000 घंटे से ज्यादा का टैक्टाइल रोबोट डेटा इकट्ठा किया। इसमें 21 तरह के सेंसर और कई तरह के रोबोट शामिल थे। टीम ने अलग-अलग सेंसर से आने वाली जानकारी को एक समान फॉर्मेट में बदलने की कोशिश की। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इससे एआई में किसी तरह की सामान्य स्पर्श समझ विकसित होती दिखाई दी और वह ऐसे हार्डवेयर पर भी बेहतर काम कर पाया जिसे उसने ट्रेनिंग के दौरान नहीं देखा था।
बिना सेंसर के भी स्पर्श की समझ
अमेरिका के सदर्न कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ऐसा मॉडल तैयार किया है जो सिर्फ कैमरे की जानकारी से स्पर्श का अनुमान लगाने की कोशिश करता है। उन्होंने 2,700 से ज्यादा रोबोटिक काम के वीडियो और डेटा से एआई को प्रशिक्षित किया। उनका कहना है कि भविष्य में कुछ रोबोट बिना महंगे सेंसर के भी स्पर्श से जुड़ी सीमित जानकारी हासिल कर सकते हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अगर अलग-अलग परिस्थितियों में करीब 1 लाख घंटे का स्पर्श डाटा इकट्ठा किया जाए तो रोबोट की क्षमता में बड़ा बदलाव आ सकता है।


