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18 जनवरी, 2021|9:34|IST

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भारत में थर्मल पावर प्लांट की राख से बनेंगी सड़कें, टीबी, दमा, कैंसर जैसी बीमारियों से होगा बचाव

roads to be built from the ashes of thermal power plant in india diseases like tb asthma cancer will

देशभर में बिजली उत्पादन में जुटे थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख (फ्लाईऐश) पर्यावरण में जहर घोलने के साथ आसपास के लोगों को टीबी, दमा, फेफडों के संक्रमण और कैंसर जैसी बीमारियों को फैला रही है। इसके निपटारे के लिए पावर प्लांट के 300 किलोमीटर की दायरे में पुल, तटबंध व राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में राख का इस्तेमाल किया जाएगा। सड़क निर्माण में राख मिट्टी व पत्थर का बेहतर विकल्प साबित होगी। इससे प्राकृतिक संसाधनों को कम नुकसान होगा।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने 23 अक्तूबर को सभी राज्यों के प्रमुख सचिवों, एनएचएआई, एनएचएआईडीसीएल, पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियरों, बीआरओ को पत्र लिखा है। इसमें पर्यावरण मंत्रायल की ओर से हाल ही में जारी अधिसूचना का जिक्र करते हुए कहा गया है कि देशभर में 40 अधिक थर्मल पावर प्लांट से हर साल निकलने वाली करोड़ों टन राख पर्यावरण के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है।

मंत्रायल के अधिकारी ने बताया कि पावर प्लांट प्रशासन 100 फीसदी राख का निपटना नहीं कर पा रहे हैं। जिस कारण मिट्टी, भूजल, नदी, हवा में राख के घुलने से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। इसलिए थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख का 300 किलोमीटर के दायरे में पुल, तटबंध व राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में अनिवार्य रूप से इस्तेमाल किया जाए। निर्माण में राख का अनुपात इंडिया रोड कांग्रेस ने पहले ही तय कर दिए हैं। सड़क बनाने में मिट्टी व पत्थर की अपेक्षा राख एक बेहतर विकल्प है। इसके परिवहन पर होने वाला खर्च 50 फीसदी खर्च पावर प्लांट उठाएगा जबकि शेष 50 फीसदी खर्च निर्माण कंपनी-ठेकेदार को उठाना होगा।

63 फीसदी बिजली थर्मल प्लांट से पैदा हो रही
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में कुल बिजली उत्पादन का करीब 63 फीसदी बिजली की जरुरत थर्मल पावर प्लांट से पूरी होती है। 2016-17 में देशभर के थर्मल पावर प्लांट से बिजली उत्पादन के कारण 169.10 मिलियन टन राख पैदा हुई। 2018-19 यह आंकड़ा बढ़कर 217.04 मिलियन टन हो गया। इसमें प्लांट 37 से 40 फीसदी राख का निपटान नहीं कर पा रहे हैं, कुछ प्लांट की स्थिति ओर भी खराब है।

केंद्र सरकार का 100 फीसदी राख का निपटाने करने का स्पष्ट ओदश है। थर्मल पावर प्लांट से निकले वाली राख में खतरनाक-जहरीले आर्सेनिक, सिलिका, एल्युमिनियम, पारा, आयरन आदि तत्व होते हैं। इससे प्लांट के आसपास लोगों को घातक-जानलेवा बीमारियों होती हैं। वहीं, भूमि, भूजल, नदी के पानी को प्रदूषित करती है।

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