विवाह समारोह का बजट 20 फीसदी बढ़ने से चिंता बढ़ी
महंगाई के कारण शादी का बजट 15 से 20 प्रतिशत बढ़ गया है। शादियों का मुख्य सीजन 19 जून 2026 से शुरू होगा। बढ़ती किमतों का असर ज्वैलरी, खाद्य सामग्री और कपड़ों पर देखा जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि विवाह समारोहों की संख्या बढ़ने से बाजार में रौनक लौटेगी, लेकिन महंगाई चिंता का विषय है।
अधिकमास समाप्त हो गया है। इसके साथ ही शादियों का मुख्य सीजन 19 जून 2026 से शुरू माना जा रहा है। जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के पहले पखवाड़े में कई विवाह मुहूर्त साथ ही एक बार फिर विवाह एवं मांगलिक कार्यक्रमों का दौर शुरु हो जायेगा, लेकिन अमेरिका ईरान के बीच तनातनी के चलते एलपीजी गैस सिलेंडर से लेकर पेट्रोल डीजल की महंगाई का असर अन्य वस्तुओं एवं खानपान की चीजो एवं कपड़े आदि के दाम बढ़े है उससे शादी का खर्च भी 15 से बीस फीसदी पबढ़ गया है। मैरिज होम, बैंक्वेट हॉल, कैटरिंग व्यवसाय, बैंड-बाजा, टेंट, फूल सजावट और ज्वैलरी बाजार में रौनक के आसार लगाए है। इस बार शादी समारोहों की खुशियों पर महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। खाद्य सामग्री से लेकर कपड़े, आभूषण और आयोजन से जुड़ी लगभग सभी सेवाएं 15 से 20 प्रतिशत तक महंगी हो गई हैं। व्यापारियों के अनुसार अधिमास के दौरान विवाह समारोह लगभग बंद रहे, जिससे संबंधित कारोबार प्रभावित हुआ था। अब शुभ मुहूर्त शुरू होने के साथ ही बाजार में ग्राहकों की भीड़ बढ़ रही है और आगामी महीनों के लिए मैरिज होम तथा बैंक्वेट हॉल की बुकिंग तेज हो गई है。
सोना-चांदी की कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल
शामली। सबसे अधिक असर ज्वैलरी बाजार में देखने को मिल रहा है। शादी समारोहों में सोना-चांदी खरीदना परंपरा का हिस्सा माना जाता है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। वर्तमान में सोना करीब 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.49 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में ही सोने के दामों में लगभग 5 हजार रुपये तथा चांदी में करीब 15 हजार रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ज्वैलर्स रवि कुमार, अशोक वर्मा, वैभव प्रकाश गोयल का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहक भारी आभूषण खरीदने के बजाय हल्के और कम वजन वाले डिजाइनों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई परिवार पुराने गहनों की अदला-बदली कर नए आभूषण बनवा रहे हैं।
कैटरिंग और खाद्य सामग्री भी हुई महंगी
शामली। शादी समारोहों के आयोजन में भोजन व्यवस्था सबसे बड़ा खर्च माना जाता है। कैटरिंग कारोबारियों रमेश बजाज, रमेशचंद सोनी के अनुसार घी, तेल, मसाले, सूखे मेवे, दूध उत्पाद, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने से प्रति प्लेट भोजन की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर विवाह समारोहों के बजट पर पड़ रहा है। कैटरिंग संचालकों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में आयोजन लागत में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इसके चलते कई परिवार मेन्यू में कटौती करने या मेहमानों की संख्या सीमित रखने पर विचार कर रहे हैं। बताया कि अब 800 वाली पलेट एक हजार की हो गई है। कॉमर्शियल सिलेंडर 3100 रूपये में मिल रहा है। इसको लेकर काफी चिंतित है। लेबर ने अपनी मजदूरी 800 रूपये सक बढाकर एक हजार कर दी है। जो चावल पहले 100 किलो मिलता था अब वह 125 रूपये प्रति किलो हो गया है।
कपड़ा बाजार में भी बढ़ी रौनक
शामली। विवाह सीजन शुरू होते ही कपड़ा बाजार में भी ग्राहकों की भीड़ बढ़ गई है। दूल्हा-दुल्हन के परिधानों के साथ-साथ रिश्तेदारों और परिजनों की खरीदारी भी शुरू हो गई है। हालांकि रेडीमेड वस्त्र, डिजाइनर लहंगे, सूट और साड़ियों के दामों में भी पिछले वर्ष की तुलना में अच्छी-खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कपडा व्यापारी दिनेश कुमार, मोनू कुमार का कहना है कि डीजल और पेंट्रोल के दामों में हुई वृद्धि के बाद भाडा महंगा हुआ है, जिसका असर कपडे के दामों पर भी पडा है। रेडीमेट गारमेंट पर करीब 15 फीसदी तक की वृद्धि हो गई। कहना है कि अधिमास से पहले बाजार पूरी तरह से मंदी के दौर से गुजर रहा है।
कारोबारियों को उम्मीदे और बढ रहा शादी का बजट
शामली। अधिमास समाप्त होने के बाद विवाह समारोहों की संख्या बढ़ने से टेंट, बैंक्वेट हॉल, डीजे, बैंड-बाजा, फ्लोरिस्ट और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी अच्छे कारोबार की उम्मीद है। व्यापारियों का कहना है कि अगले कुछ महीनों में विवाह समारोहों की भरमार रहने से बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। वही विवाह समारोहों की तैयारियों में जुटे परिवारों सुरेश कुमार, सलीम अहमद का कहना है कि महंगाई के कारण शादी का बजट लगातार बढ़ता जा रहा है। आभूषण, कपड़े, भोजन और सजावट सहित हर क्षेत्र में बढ़ी कीमतों ने खर्चों को काफी बढ़ा दिया है। इसके बावजूद सामाजिक परंपराओं और रिश्तों को निभाने के लिए लोग अपनी क्षमता के अनुसार तैयारियां करने में जुटे हुए हैं।
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