बाढ़ पीड़तों को सुविधाएं मुहैया कराए प्रशासन: विजय शंकर
सिसवन, एक संवाददाता। घाघरा नदी में आई अप्रत्याशित जलस्तर की वृद्धि से गुठनी दरौली रधुनाथपुर सिसवन में सरयू नदी खतरे के निशान से उपर बह रही है। घाघरा दरौली में खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर उपर है।...

सिसवन, एक संवाददाता। घाघरा नदी में आई अप्रत्याशित जलस्तर की वृद्धि से गुठनी दरौली रधुनाथपुर सिसवन में सरयू नदी खतरे के निशान से उपर बह रही है। घाघरा दरौली में खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर उपर है। अगर पानी की स्थिति इसी प्रकार बढ़ता रहा तो यह 1998 में आई बाढ़ से भी ऊपर हो जाएगा। यह बातें पूर्व मंत्री विजय शंकर दुबे व रघुनाथपुर के पूर्व विधायक ने बातचीत का दौरान कही। बढ़ते जलस्तर के कारण जिले के गुठनी, दरौली, रघुनाथपुर, सिसवन के प्रखंड में सरयू नदी के तटीय इलाकों के निवासी काफी परेशान हैं और किसी अनहोनी की आशंका से भयभीत नजर आ रहे हैं।
बाढ़ से फसल का नुकसान
तटीय इलाके के और दियारे इलाके में लगे के धान और मक्के की फसल डूब चुकी है। दियारे इलाके में रहने वाले तटबंधों पर शरण लिए हूए है। फसलों का नष्ट होने और पशुओं के सामने चारे की समस्या उत्पन्न हो रही है। ऐसी स्थिति में किसानों के सामने भुखमरी की समस्या उत्पन्न होगी। सरकार और जिला प्रशासन के पदाधिकारी अभी तक इन गावो का दौरा भी नही किए है। गांव के लोगों की सुधी लेने आज तक नहीं आए नहीं दौरा किया।
प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता
हालांकि बाढ विभाग के जेई तटबंधों के संरक्षण के लिए भ्रमण करते नजर आये। 1998 में घाघरा नदी में आई बाढ़ में गुठनी दरौली रघुनाथपुर नरहन गभीरार बरुआ भागर गंगपुर सिसवन ग्यासपुर साईपुर इत्यादि गांवों के लोगों के लिए नाव व राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई थी और प्रशासनिक चौकसी बरती गई थी। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री से मिलकर इस पर बात करेंगे और बाढ़ पीड़ितों के लिए हर संभव सहायता करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पेयजल पशुचारा का प्रबंध राहत सामग्री और नागरिकों के स्वास्थ्य सुविधाओं व जनता की स्वास्थ्य सुविधाओं की सतत निगरानी रखी जानी चाहिए।


