बचाव स्थलों तक पहुंचा पानी, संवेदनशील हिस्सों की निगरानी तेज
कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है, जिससे तटवर्ती क्षेत्रों में चिंता बढ़ गई है। बाढ़ खंड ने तटबंधों की निगरानी तेज कर दी है। जलस्तर की वृद्धि से कटान का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने जर्जर तटबंधों को मजबूत करने की मांग की है।

कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। बड़ी गंडक नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े गए पानी में वृद्धि के कारण तटवर्ती इलाकों में लोगों की चिंता बढ़ गई है। जलस्तर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुए बाढ़ खंड ने तटबंधों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था तेज कर दी है। बढ़ते जलस्तर का असर तटबंधों और बाढ़ बचाव कार्यों पर भी दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर नदी की धारा तटबंध से सटकर बह रही है, जबकि कुछ जगहों पर स्परों (ठोकरों) से टकरा रही है।विरवट तटबंध के किलोमीटर 8.700 के आसपास नदी का दबाव बढ़ गया है।
इससे यह क्षेत्र संवेदनशील बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो यहां कटान का खतरा बढ़ सकता है। उधर, नरवाजोत एवं एपी तटबंध की सुरक्षा के लिए चल रहे बाढ़ बचाव कार्यों पर भी नदी का असर दिखने लगा है। कई निर्माण स्थलों तक पानी पहुंच गया है। विभाग की एक परियोजना पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य परियोजनाएं अंतिम चरण में हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि तटबंध के जर्जर और संवेदनशील हिस्सों को समय रहते और मजबूत किया जाए ताकि संभावित बाढ़ की स्थिति में नुकसान से बचा जा सके। तटवर्ती गांवों के लोग लगातार नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। बाढ़ खंड के एसडीओ दीप रत्न सिंह ने बताया कि सभी तटबंधों की नियमित निगरानी की जा रही है। जहां स्लोप पिचिंग का कार्य शेष है, उसे तेजी से पूरा कराया जा रहा है। वहीं, जूनियर इंजीनियर रमेशधर दुबे ने बताया कि संवेदनशील स्थलों पर विभागीय टीमें तैनात हैं और नदी के जलस्तर में होने वाले हर बदलाव पर लगातार नजर रखी जा रही है।


