देश के 22 फीसदी हिस्सों में भूजल में तय सीमा से अधिक है नाइट्रेट की मात्रा
प्रभात कुमार नई दिल्ली। देश के 22 फीसदी हिस्सों में भूजल में नाइट्रेट की मात्रा

प्रभात कुमार नई दिल्ली।
देश के 22 फीसदी हिस्सों में भूजल में नाइट्रेट की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई है। इसमें सुधार होने के बजाए, हर साल बढ़ोतरी हो रही है और पिछले 3 सालों में 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीडब्ल्यूजी) की ओर से पेश रिपोर्टों से इसका खुलासा हुआ है। दिल्ली, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों के पानी के नमूने में सबसे अधिक नाइट्रेट की मात्रा पाई गई। इन राज्यों में राष्ट्रीय औसत से अधिक हिस्सों के पानी में नाइट्रेट की मात्रा अधिक पाई गई। नाइट्रेट की अधिकता से बच्चों में ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ जैसी बीमारी का खतरा काफी अधिक बढ़ जाता है।
भूजल परीक्षण की रिपोर्ट
एनजीटी में पेश अपनी रिपोर्ट में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने कहा है कि उसने 2025 में मानसून से पहले देशभर में भूजल के 23,610 नमूने लेकर उसमें नाइट्रेट, फ्लोराइड, आयरन, यूरेनियम, आर्सेनिक एवं अन्य तत्वों की जांच की। रिपोर्ट में कहा कि जांच में पाया कि भूजल के 22.02 फीसदी नमूनों में नाइट्रेट की मात्रा तय मानक से अधिक पाया गया है। हालांकि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण द्वारा ही 2024 में पानी की गुणवत्ता जांच कराने के लिए मानसून से पहले कराए गए सर्वे में जांच रिपोर्ट के मुताबिक 20.7 फीसदी हिस्सों में ही पानी में नाइट्रेट तय सीमा से अधिक पाई गई थी। जबकि 2023 की रिपोर्ट में यह महज 19.8 फीसदी हिस्सों में नाइट्रेट की मात्रा तय सीमा से अधिक पाया गया। 2023 और 2024 में करीब देशभर से पानी के 15 हजार नमूने लेकर जांच किए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि पीने के पानी में नाइट्रेट की मात्रा अधिक होने से बच्चों में ब्लू बेबी सिंड्रोम का खतरा अधिक होता है। एनजीटी में पेश रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब जैसे राज्यों के पानी के नमूने में नाइट्रेट की मात्रा अधिक मिले। तय मानक के अनुसार 45 एमजी प्रति लीटर से नाइट्रेट की मात्रा अधिक नहीं होनी चाहिए।
फ्लोराइड और इलेक्ट्रिसिटी कंडक्टिविटी
भूजल प्राधिकरण ने कहा है कि 2025 में मानसून से पहले कराए गए जांच रिपोर्ट के मुताबिक भूजल में नाइट्रेट के अलावा फ्लोराइड और इलेक्ट्रिसिटी कंडक्टिविटी (ईसी) की मात्रा भरी अधिक पाई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में 9.23 फीसदी हिस्सों में फ्लोराइड और 7.25 फीसदी हिस्सों में पानी में इलेक्ट्रिसिटी कंडक्टिविटी की मात्रा अधिक पाई गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्लोराइड और इलेक्ट्रिसिटी कंडक्टिविटी (ईसी) की तय सीमा से अधिक वाला पानी के इस्तेमाल से लोगों में दिल की बीमारी और हड्डियों के बीमारी को खतरा अधिक हो जाता है।
दिल्ली और झारखंड की रिपोर्ट
दिल्ली के भूजल में पहले से अधिक बढ़ा नाइट्रेट
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 2025 में 208 जगहों से पानी के नमूने लेकर जांच कराए गए और इनमें से 72 नमूनों में यानी 34.62त्न में नाइट्रेट की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई। जबकि 2024 में दिल्ली में 20.9 फीसदी हिस्सों में ही भूजल में नाइट्रेट की मात्रा अधिक थी।
झारखंड में तेजी से बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 2025 में 561 जगहों से पानी के नमूने लेकर जांच कराए गए और इनमें से 161 नमूनों में यानी 25.13 फीसदी में नाइट्रेट की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई। जबकि 2024 में दिल्ली में 5.9 फीसदी हिस्सों में ही भूजल में नाइट्रेट की मात्रा अधिक थी।
राज्यवार नाइट्रेट के स्तर
राज्य जांच पानी में राष्ट्रीय औसत से अधिक नाइट्रेट मिले।
राजस्थान- 41.73 फीसदी
कर्नाटक- 36.49 फीसदी
मध्य प्रदेश-22.23 फीसदी
आंध्र प्रदेश- 31 फीसदी
दिल्ली- 34.62 फीसदी
झारखंड- 25.13 फीसदी
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