कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, फिसले बाजार
शोल्डर ::: पश्चिम एशिया में संकट बढ़ने से शेयर बाजारों पर दिख रहा असर

नई दिल्ली, एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर बुधवार को कच्चे तेल और भारतीय शेयर बाजार, दोनों पर दिखाई दिया। ब्रेंट कच्चा तेल छह सप्ताह में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि महंगे तेल और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम से भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र गिरावट रही। सेंसेक्स 813 अंक लुढ़क कर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 23,450 अंक के नीचे फिसल गया। पश्चिम एशिया में तेल संयंत्रों और टैंकर पर हुए हमलों के बाद ब्रेंट कच्चा तेल का वायदा भाव बुधवार को करीब छह सप्ताह में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के दौरान पहले से प्रभावित आपूर्ति व्यवस्था पर और दबाव बढ़ने की आशंका से तेल की कीमतों में तेजी आई। ब्रेंट क्रूड 2.94 प्रतिशत बढ़कर 100.73 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चे तेल का सबसे अधिक कारोबार वाला वायदा अनुबंध मंगलवार को 97.89 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था.
भारतीय बाजारों पर सीधा असर
कच्चे तेल के दाम उछलने का सीधा असर भारतीय बाजारों पर दिखा और लगातार तीसरे दिन बिकवाली का दबाव बना रहा। इसके चलते सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत लुढ़क कर करीब तीन महीने के निचले स्तर 74,764.23 अंक पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,431.50 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर सबसे अधिक 4.55 प्रतिशत टूटा।इसके अलावा, नुकसान में रहने वाले शेयरों में एचडीएफसी बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर शामिल हैं.
आईटी क्षेत्र में सबसे अधिक बिकवाली
सेंसेक्स की कंपनियों में एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर साढ़े चार प्रतिशत नीचे बंद हुआ। सबसे अधिक नुकसान उठाने वाली अगली तीन कंपनियां भी आईटी सेक्टर से ही रहीं। इंफोसिस का शेयर भी साढ़े चार प्रतिशत के करीब टूटा। टेक महिंद्रा में लगभग चार फीसदी और टीसीएस में सवा दो फीसदी की गिरावट रही.
इन शेयरों में आई भारी गिरावट
हिंदुस्तान यूनीलिवर, बजाज फाइनेंस, अल्ट्रा टेक सीमेंट, भारती एयरटेल, बीईएल और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर एक से दो प्रतिशत के बीच फिसले। आईटीसी, इंडिगो, एलएंडटी, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, भारतीय स्टेट बैंक, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा और इटरनल के शेयर भी लाल निशान में बंद हुए.
कच्चे तेल का सीधा असर
1. महंगाई बढ़ने का खतराकच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन के दाम भी बढ़ सकते हैं। इससे यात्रा की लागत बढ़ने के साथ-साथ ताजा खाद्य पदार्थों और फर्नीचर तथा घरेलू उपकरणों जैसी लंबी दूरी तक भेजी जाने वाली वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.
2. रुपये पर भी दबावमहंगे कच्चे तेल का असर रुपये पर भी पड़ रहा है। मंगलवार को रुपया 33 पैसे कमजोर होकर 94.81 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। तेल की ऊंची कीमत से भारत का आयात बिल बढ़ने की आशंका बढ़ गई है.
3. निवेशकों की चिंता बढ़ीमहंगे तेल ने निवेशकों की चिंता इसलिए भी बढ़ाई है क्योंकि इससे कंपनियों की लागत और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है। बुधवार को बाजार में 16 में से 13 प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक गिरावट में रहे.
4. सरकार पर दबाव बढ़ेगाकच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश का डॉलर में होने वाला आयात खर्च बढ़ता है, जिससे व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव पड़ सकता है.
5. कंपनियों के मुनाफे पर असरमहंगा कच्चा तेल विमानन, पेंट, टायर, रसायन, लॉजिस्टिक और उपभोक्ता सामान जैसे तेल पर निर्भर क्षेत्रों के मुनाफे पर दबाव डालेगा.
पेट्रोलियम कंपनियों को भी नुकसान
कच्चे तेल की कीमत चढ़ने से सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब पांच रुपये और डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, अगर खुदरा स्तर पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बदलाव नहीं किया जाता है, तो पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को इनकी बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ता है। फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तीन महीने से अधिक समय से कोई बदलाव नहीं हुआ है। आखिरी बार 25 मई को कीमतों में संशोधन किया गया था, जब पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था.


