जिले में सात सेमी प्रति घंटे बढ़ रहा है गंगा का जलस्तर
मिर्जापुर में शनिवार रात से गंगा का जलस्तर 70.140 मीटर तक पहुंच गया है, जो कि चेतावनी बिंदु से 6.584 मीटर नीचे है। तटवर्ती गांवों के किसानों में बाढ़ की चिंता बढ़ गई है। डीएम ने बाढ़ चौकियों को सतर्क करने और पशुओं के चारे की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं।

मिर्जापुर, संवाददाता। जिले में शनिवार की रात से गंगा के जलस्तर में सात सेमी प्रति घंटे की दर से घट रहा है। गंगा के जलस्तर में तीब्र गति से वृद्धि होने से तटवर्ती इलाके के किसानों को संभावित बाढ़ की चिंता सताने लगी है। वहीं रविवार को सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर 70.140 मीटर रिकार्ड किया गया। यह जलस्तर चेतावनी बिंदु 76.724 मीटर से 6.584 मीटर नीचे है। संभावित बाढ़ को लेकर छानबे, कोन, पहाड़ी, मझवां, सीखड़ और नरायनपुर ब्लॉक के तटवर्ती गांवों के लोग चिंतित है। डीएम पवन कुमार गंगवार ने एसडीएम सदर और चुनार को बाढ़ प्रभावित इलाकों में नजर रखने का निर्देश दिया है। कहा है कि संभावित बाढ़ को देखते हुए बाढ़ चौकियों को सतर्क कर दिया जाए। प्रत्येक बाढ़ चौकी पर लेखपाल और अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी जाए। इसके अलावा पशुओं के लिए चारा की व्यवस्था कर ली जाए。
बाढ़ नियंत्रण स्थिति
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में हुई भारी बारिश के कारण जिले में गंगा के जलस्तर में शनिवार की रात से ही वृद्धि शुरु हो गई है। रविवार की सुबह छह बजे से गंगा के जलस्तर में सात सेमी प्रति घंटे की दर से रिकार्ड किया गया। गंगा के जलस्तर में वृद्धि से जिला प्रशासन के साथ ही तटवर्ती गांवों के किसान संभावित बाढ़ को लेकर चिंतित है। गंगा के तटवर्ती ब्लाक छानबे, कोन, मझवां, पहाड़ी, सीखड़ और नरायनपुर ब्लॉक के लगभग चार सौ गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। इन गांवों में बोई गई फसलें भी गंगा के बाढ़ के पानी में डूब जाएंगी। गंगा के बाढ़ के पानी से गंगा की सहायक नदियों के जलस्तर में वृद्धि हो गयी है। जिले के कर्णावती नदी, ओझला नदी, खजुरी नदी, बेलवन नदी, चट्टरनदी और जरगो नदी के जलस्तर में भी वृद्धि शुरू हो गयी है। गंगा के बाढ़ का पानी इन नदियों में पहुंच रहा है। इससे नदियों के किनारे स्थित गांवों के किसान फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। बाढ़ की स्थिति में पशुओं के समक्ष चारा की भी समस्या खड़ी हो जाएगी।


