उच्च शिक्षा में पांच सालों में बढ़ गईं 16 फीसदी मुस्लिम बेटियां
कानपुर में मुस्लिम लड़कियों में शिक्षा का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। पिछले पांच वर्षों में, मुस्लिम बेटियों की संख्या में 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2021 में करीब 5 फीसदी मुस्लिम बेटियां थीं, जबकि इस साल यह संख्या 21 फीसदी से अधिक हो गई है।

कानपुर। प्रमुख संवाददाता मुस्लिम परिवार की बेटियों में शिक्षा का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। कानपुर और आसपास जिलों के महाविद्यालयों में पिछले पांच वर्षों के दौरान मुस्लिम बेटियों की संख्या में 16 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। इसका खुलासा पीपीएन कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक और कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) के अध्यक्ष प्रो. बीडी पांडेय के सर्वे में हुआ। उन्होंने सात जिलों के करीब 30 से अधिक कॉलेजों में चल रहे प्रवेश के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है।
शिक्षा का बढ़ता आंकड़ा
प्रो. बीडी पांडेय ने बताया कि कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, कन्नौज, फर्रुखाबाद, इटावा व औरैया स्थित सभी महाविद्यालय छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) से संबद्ध हैं। इन सभी कॉलेजों में बीए, बीएससी, बीकॉम समेत अन्य प्रोफेशनल कोर्स में दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। कॉलेजों में बने प्रवेश प्रभारियों की रिपोर्ट के आधार पर यह सर्वे तैयार किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं में करीब पांच फीसदी मुस्लिम बेटियां थी। लेकिन, इस साल चल रहे प्रवेश में मुस्लिम बेटियों की संख्या 21 फीसदी से अधिक है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि अधिकतर मुस्लिम बेटियां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवार से जुड़ी हैं। वहीं, इन परिवारों में लड़के हैं लेकिन वे उच्च शिक्षा में दाखिला लेने के बजाए अपने हुनर के अनुसार रोजगार कर रहे हैं।
उच्च शिक्षा में वृद्धि
प्रो. पांडेय ने बताया कि जिन परिवारों की बेटियां स्नातक या परास्नातक की पढ़ाई कर रही हैं, उनमें से अधिकांश के भाई हाईस्कूल या इंटर ही पास हैं। उच्च शिक्षा में मुस्लिम बेटियों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2023 में करीब 12 फीसदी मुस्लिम बेटियों ने दाखिला लिया था।


