बेहतर जीवनशैली के लिए धड़ल्ले से कर्ज ले रहे लोग
शोल्डर : बीते सात वर्षों में उपभोग कर्ज में 4.05 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की

नई दिल्ली, अरुण चट्ठा। बदलती जीवनशैली के बीच जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग धड़ल्ले से कर्ज ले रहे हैं। टीवी, फ्रिज, एसी मोबाइल, वाहन खरीदने से लेकर घूमने जैसी हर जरूरतों को कर्ज लेकर पूरा किया जा रहा है। नतीजतन बीते सात वर्षों के दौरान उपभोग कर्ज की हिस्सेदारी तेजी से बढ़कर 49.7 फीसदी तक पहुंच गई है।
उपभोग ऋण की बढ़ती हिस्सेदारी
आरबीआई के आंकड़े के अनुसार, मार्च 2019 से मार्च 2026 के बीच उपभोग ऋण 4.05 गुना बढ़ गया है। वहीं, कुल घरेलू कर्ज में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 49.7 फीसदी पहुंच गई है। इसके मुकाबले घर, जमीन जैसी संपत्ति खरीदने के लिए लिए जाने वाले परिसंपत्ति निर्माण ऋण में 2.42 गुना और कारोबार व अन्य उत्पादक गतिविधियों के लिए लिए जाने वाले ऋण में 3.07 गुना बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2019 तक तीनों श्रेणियों के कर्जों की हिस्सेदारी लगभग बराबर थी।
सात वर्षों में बदली तस्वीर
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 तक लोगों का ज्यादा ध्यान घर खरीदने या कारोबार बढ़ाने पर था। उस समय बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले कर्ज में सबसे बड़ी हिस्सेदारी परिसंपत्ति निर्माण ऋण की थी। इसके बाद उपभोग ऋण का स्थान था। लेकिन पिछले सात वर्षों में तस्वीर बदल गई है और अब सबसे बड़ी हिस्सेदारी उपभोग ऋण की हो गई है।
इन जरूरतों के लिए ले रहे कर्ज
रिपोर्ट के अनुसार, उपभोग ऋण में पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, टीवी, फ्रिज, एसी, मोबाइल, लैपटॉप, फर्नीचर, दोपहिया वाहन और कई अन्य घरेलू जरूरतों के लिए लिए गए कर्ज शामिल हैं। हाल के वर्षों में घूमने-फिरने और निजी खर्चों के लिए भी लोग कर्ज या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल अधिक करने लगे हैं।
किस्त चुकाने में जा रही आधी से अधिक आमदनी
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि आज कई लोगों की मासिक आय का बड़ा हिस्सा ईएमआई चुकाने में खर्च हो रहा है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति की मासिक आय 50 हजार रुपये है तो करीब 30 हजार रुपये अलग-अलग कर्ज की ईएमआई में चले जाते हैं। इसमें होम लोन के अलावा मोबाइल, फ्रिज, एसी, लैपटॉप और अन्य सामान की किस्तें भी शामिल होती हैं। वॉयस ऑफ बैंकिंग के संस्थापक अश्विनी राणा का कहना है कि कर्ज लेकर बढ़ता उपभोग अर्थव्यवस्था और कंपनियों के लिए तो अच्छा हो सकता है, लेकिन परिवारों के लिए यह लंबे समय में जोखिम पैदा कर सकता है। यदि अचानक नौकरी चली जाए या आमदनी कम हो जाए तो कई परिवारों के लिए कुछ महीनों तक भी खर्च चलाना मुश्किल हो सकता है।
आरबीआई ने जताई चिंता
आरबीआई ने भी उपभोग ऋण में तेजी से हो रही बढ़ोतरी पर चिंता जताई है। उसका कहना है कि घरेलू ऋण की संरचना में बदलाव वित्तीय प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए उपभोग आधारित और विशेष रूप से असुरक्षित व्यक्तिगत ऋणों की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखना आवश्यक है, जिससे भविष्य में वित्तीय जोखिम न बढ़ें।
मार्च 2026 तक कुल घरेलू उधारी की स्थिति
कर्ज का प्रकार हिस्सेदारा (प्रतिशत में)
उपभोग 49.7%
परिसंपत्ति निर्माण 33.5%
उत्पादक गतिविधि 16.8%
ऋण सूचकांक में भारी बढ़ोतरी
ऋण सूचकांक
उपभोग ऋण 405
उत्पादक ऋण 307
परिसंपत्ति निर्माण 242
नोट - मार्च 2019 को आधार (सूचकांक = 100) मानने पर मार्च 2026 तक का आकलन किया गया।
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