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समानता का अधिकार सरकार व उसके तंत्रों के खिलाफ लागू करने योग्य अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

भाषा,नई दिल्लीAshutosh Ray
Wed, 27 Oct 2021 01:01 AM
समानता का अधिकार सरकार व उसके तंत्रों के खिलाफ लागू करने योग्य अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत प्रदत समानता का अधिकार इसका दावा करने वाले व्यक्ति के पक्ष में निहित अधिकार है, साथ ही यह सरकार एवं उसके तंत्रों के खिलाफ लागू करने योग्य है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि समानता एक निश्चित अवधारणा है जिसमें संवैधानिक गारंटी की प्रकृति से उत्पन्न एक अंतर्निहित सीमा है।जस्टिस एम आर शाह और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने अब बंद हो चुके आजम जाही मिल्स के 318 पूर्व कर्मचारियों द्वारा दायर अपील को अनुमति प्रदान कर दी, जिसमें 134 पूर्व कर्मचारियों के साथ समानता की मांग की गई थी।

मिल के 134 पूर्व कर्मचारियों को 200 वर्ग गज के भूखंड नि:शुल्क आवंटित किए गए थे। पीठ ने कहा, 'उपरोक्त को देखते हुए और ऊपर बताए गए कारणों से, ये दोनों अपीलें स्वीकार की जाती हैं। हैदराबाद में तेलंगाना हाई कोर्ट की ओर से 19 फरवरी, 2020 को दिये गये इस विवादित निर्णय और आदेश को निरस्त किया जाता है तथा एकल न्यायाधीश द्वारा पारित निर्णय और आदेश को बहाल किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि काकतीया शहरी विकास प्राधिकरण (कुडा) और राज्य सरकार के शहरी विकास विभाग तत्कालीन आजम जाही मिल्स के शेष 318 पूर्व कर्मचारियों को भी उन 134 पूर्व कर्मचारियों के समान माने और उनकी अर्जी पर विचार करे, जिन्हें 2007 के सरकारी आदेशानुसार 200 वर्ग मीटर की भूखंड नि:शुल्क आवंटित किया गया था। पीठ ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत प्रदत समानता का अधिकार इसका दावा करने वाले व्यक्ति के पक्ष में निहित है और यह संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत शक्तियों के प्रयोग में सरकार एवं इसके साधनों के खिलाफ लागू करने योग्य है।

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