धान की रोपाई के समय ही करें खरपतवार पर वार

हिन्दुस्तान, अलीगढ़
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अलीगढ़ में रिमझिम बारिश के साथ धान की रोपाई तेजी से हो रही है। मंडल में तीन लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में धान रोपने का लक्ष्य है। मानसून के धीमे रहने की आशंका से खरपतवार बढ़ने की संभावना है। कृषि निदेशक डॉ. सतीश मलिक ने खरपतवार नियंत्रण के उपाय बताए हैं।

धान की रोपाई के समय ही करें खरपतवार पर वार

अलीगढ़, कार्यालय संवाददाता। रिमझिम बारिश के साथ ही धान की रोपाई ने रफ्तार पकड़ ली है। मंडल में करीब तीन लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबा में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में समय रहते हुए रसायनों का प्रयोग कर खरपतवार को रोका जा सकता है। इनके उगने के बाद रोकथाम तो हो जाती है, लेकिन जब तक फसल में कुछ नुकसान हो सकता है।इस बार मानसून के धीमा रहने की आशंका व्यक्त की गई है। ऐसे में पानी की कमी होने पर खरपतवार अधिक होने की संभावना बनी हुई है। इस दौरान मैथा, समा, बिसुखपरिया, कनकॉवा, चैडी, संकरी पत्ती के खरपतवार हो सकते है।

उप कृषि निदेशक कृषि रक्षा डॉ. सतीश मलिक ने इस पर नियंत्रण के उपाय बताए हैं। उन्होंने बताया कि खरपतवार से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए समय से ही खरपतवार को नियंत्रित करना चाहिए। बताया कि धान की रोपाई के दो से पांच दिन बाद ब्यूटाक्लोर 50 प्रतिशत ईसी, एनीलोफास 30 प्रतिशत ईसी, प्रेटिलाक्लोर 50 ईसी, पाइरोजोसल्फ्पूरान इथाईल 10 प्रतिशत डब्ल्यूपी में से एक रसायन को निर्धारित मात्रा में 500 लीटर पानी में घोलकर लगाना चाहिए। रसायन लगाने के दौरान खेत में 2 इंच पानी होना चाहिए। अगर रोपाई के समय यह रसायन नहीं लगाई गई है और संकरी पत्ती का खरपतवार हो गया है तो विसपाइरीवैक सोडियम 10 प्रतिशत एससी निर्धारित मात्रा में रोपाई से 20 से 25 दिन के बाद लगाएं। गाजर घास, चैलाई आदि चैडी पत्ती के खरपतवार के लिए मेटसलफ्पूरान मिलाइन 20 प्रतिशत डब्ल्यू पी, 2,4 डी इथाइलईस्टर 38 प्रतिशत ईसी को रोपाई के 20 दिन बाद किसी भी एक रसायन को निर्धारित मात्रा में लगाएं।

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